Ranchi. झारखंड उच्च न्यायालय ने बुधवार को उन सरकारी कर्मचारियों की सेवा समाप्ति पर लगी रोक की अवधि बढ़ा दी, जिनकी नियुक्तियां राज्य लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) और कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) द्वारा आयोजित कुछ परीक्षाओं के रद्द होने से प्रभावित हुई थीं। न्यायमूर्ति दीपक रोशन ने राज्य सरकार के उस फैसले को चुनौती देने वाली कर्मचारियों की याचिकाओं पर सुनवाई की, जिसमें परीक्षाएं रद्द करने और उसके बाद उनकी सेवाएं समाप्त करने का निर्णय लिया गया था।

सुनवाई बुधवार को पूरी नहीं हो सकी और यह बृहस्पतिवार को भी जारी रहेगी। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव रंजन, इंद्रजीत सिन्हा और अमृतांश वत्स ने दलील दी कि राज्य सरकार ने जेपीएससी और जेएसएससी द्वारा आयोजित परीक्षाओं को मनमाने ढंग से रद्द कर दिया था।

वकीलों ने दलील दी कि कथित अनियमितताओं की जांच के लिए गठित विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने परीक्षा के आयोजन से जुड़ी किसी भी गड़बड़ी में प्रभावित अभ्यर्थियों की कोई मिलीभगत या संलिप्तता साबित नहीं की है। राज्य सरकार ने 18 अगस्त को एक अधिसूचना जारी कर 2014 से जेपीएससी और जेएसएससी द्वारा आयोजित परीक्षाओं को रद्द कर दिया था।
इस निर्णय का असर दोनों आयोग द्वारा आयोजित लगभग 23 परीक्षाओं पर पड़ा और इसके परिणामस्वरूप सरकारी नौकरी हासिल कर चुके सफल अभ्यर्थियों के समक्ष नौकरी से निकाले जाने का जोखिम पैदा हो गया। उच्च न्यायालय उन कई सफल अभ्यर्थियों की याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है जो अभी सरकारी सेवा में कार्यरत हैं। सरकार ने भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं की जारी जांच के बाद नियुक्तियां रद्द करने के लिए 18 अगस्त को अधिसूचना जारी की थी।

