


Ranchi. रांची सिरमटोली फ्लाईओवर के रैंप को लेकर चल रहा विवाद सरहुल के दिन भी कायम रहा. सरना स्थल को लेकर सरना समिति में ही दो गुट हो गए है. एक गुट प्रशासन के द्वारा रैंप का एक हिस्सा हटाये जाने के बाद विरोध करना छोड़ चुका है. लेकिन कांग्रेस नेता गीताश्री उरांव के गुट रैंप को पूरी तरह से हटाने को लेकर अड़ा हुआ है. गीताश्री उरांव के नेतृव में कुछ लोग काली पट्टी लगा कर लगातार सरहुल पूजा के दौरान भी हंगामा करते नजर आए. मंच पर ही सरना समिति के दोनों गुट कई बार आपस मे भिड़ गए. कई बार दोनों पक्ष के बीच मारपीट भी हुई.
झड़प से तनावपूर्ण स्थिति पैदा हो गयी. यह झड़प उस वक्त हुई, जब यहां मुख्य सरना स्थल पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनकी पत्नी कल्पना सोरेन पूजा करने पहुंचे. उस समय वहां फ्लाइओवर के रैंप का विरोध करनेवाले एक संगठन द्वारा मुख्यमंत्री विरोध किया गया. विरोध करनेवाले माथे पर काली पट्टी लगाये हुए थे. विरोध करनेवालों का केंद्रीय सरना समिति के नेता अजय तिर्की के नेतृत्व में कुछ लोगों ने विरोध जताया. दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस और हल्की झड़प भी हुई. इस बीच कुछ पल के लिए सिरमटोली स्थित सरना स्थल का माहौल तनावपूर्ण हो गया. दोनों पक्ष के लोग आमने-सामने थे, लेकिन पुलिस और प्रशासन ने हालात बिगड़ने नहीं दिया. अधिकारियों ने हालात को संभाला. रांची के उपायुक्त मंजुनाथ भजंत्री, एसएसपी चंदन कुमार सिन्हा और एसडीओ उत्कर्ष कुमार मौके पर मौजूद थे. इस बीच हेमंत सोरेन और उनकी पत्नी कल्पना सोरेन ने सरना स्थल पर कड़ी सुरक्षा के बीच लकड़ी के चूल्हे के पास खिचड़ी प्रसाद के साथ पूजा-अर्चना की और वहां से आदिवासी हॉस्टल में सरहुल पर आयोजित कार्यक्रम में भाग लेने के लिए चले गये.
गीताश्री उरांव माथे पर काली पट्टी बांध कर रही थीं विरोध
सीएम का विरोध करने वाले आदिवासी समूहों की अगुवाई पूर्व मंत्री गीताश्री उरांव कर रही थीं. वह केंद्रीय सरना स्थल पर बने मंच पर विराजमान थीं. विरोधी गुट के लोग सिर और हाथों में काली पट्टी बांधे हुए थे. अजय तिर्की ने खुद पर लग रहे आरोपों पर कहा कि स्वार्थवश कुछ लोगों द्वारा मुझे चोर-दलाल कहा जा रहा है. अपने बीच के कुछ लोग जानबूझ कर विवाद पैदा कर रहे हैं. वहीं, गीताश्री उरांव ने कहा कि सिरमटोली में आदिवासियों का सबसे बड़ा सरना स्थल है. यह आदिवासी संस्कृति का सबसे बड़ा केंद्र है, जहां हर साल सरहुल के मौके पर रांची और आसपास के इलाकों से निकाली जाने वाली विशाल शोभायात्राओं का समागम होता है. उन्होंने कहा कि विरोध करना उनका संवैधानिक अधिकार है, तभी हम अपने अधिकारों की रक्षा कर सकते हैं.



