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Jharkhand Union Strike : झारखंड में देशव्यापी आम हड़ताल का मिलाजुला असर, बैंकिंग, खनन, बीमा सहित अन्‍य क्षेत्रों में 500 करोड़ का कारोबार प्रभावित

Ranchi. झारखंड में देशव्यापी आम हड़ताल और चक्का जाम आंदोलन का बुधवार को मिलाजुला असर देखा गया. श्रमिक संगठनों ने दावा किया कि चार नयी श्रम संहिताओं सहित केंद्र सरकार की नीतियों के विरोध में बुधवार को बुलाई गई राष्ट्रव्यापी हड़ताल से राज्य में कोयला, बैंकिंग और अन्य क्षेत्र प्रभावित हुए. झारखंड में करीब 500 करोड़ के कारोबार प्रभावित हुए हैं. इस राष्ट्रव्यापी आम हड़ताल का आह्वान श्रमिक संगठनों के एक संयुक्त मंच ने किया था, जिसमें 10 केंद्रीय श्रमिक संगठनों के साथ स्वतंत्र अखिल भारतीय क्षेत्रीय महासंघ शामिल हैं. झारखंड में इस हड़ताल को श्रमिक संगठनों, वाम दलों, सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो), कांग्रेस, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) जैसे दलों का समर्थन प्राप्त था. श्रमिक संगठनों के नेताओं ने दावा किया कि झारखंड स्थित खदानों में कोयले का उत्पादन, लदान और परिवहन बुरी तरह प्रभावित हुआ क्योंकि कोयला खनिक हड़ताल पर हैं.

भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल), सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (सीसीएल) और ईस्टर्न कोलफील्ड्स (ईसीएल) के अधिकारियों ने हालांकि दावा किया कि हड़ताल का कोई बड़ा असर नहीं हुआ है. राष्ट्रीय मजदूर कांग्रेस (इंटक) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ब्रजेन्द्र प्रसाद सिंह ने दावा किया कि हड़ताल सफल रही, क्योंकि खनन, बैंकिंग और बीमा सहित अन्य क्षेत्रों के श्रमिक हड़ताल पर हैं. बैंक ऑफ इंडिया एम्प्लाइज यूनियन की झारखंड इकाई के उप महासचिव उमेश दास ने दावा किया कि भारतीय स्टेट बैंक और निजी बैंकों को छोड़कर सभी बैंकों में बैंकिंग सेवाएं प्रभावित रहीं.

रांची में विभिन्न श्रमिक संघों और राजनीतिक दलों जैसे वाम, झामुमो, कांग्रेस और राजद के कार्यकर्ताओं ने संयुक्त रूप से दो रैलियां निकालीं। ये रैलियां चार श्रम संहिताओं को निरस्त करने सहित उनकी 17 सूत्री मांगों के समर्थन में निकाली गईं.

रैली सैनिक मार्केट और कचहरी से निकाली गईं और अल्बर्ट एक्का चौक पर एक जनसभा के साथ समाप्त हुईं. ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (एआईटीयूसी) की झारखंड इकाई के महासचिव सुवेन्दु सेन ने कहा, ‘चार श्रम संहिताएं श्रमिकों की सुरक्षा को कमजोर कर और सामाजिक सुरक्षा लाभों को कम कर उनका शोषण करने के लिए बनाई गई हैं. हालांकि, राज्य की राजधानी की सड़कों और बाजारों में हड़ताल का कोई खास असर देखने को नहीं मिला. सार्वजनिक परिवहन भी अप्रभावित रहा.रामगढ़ जिले में हड़ताल के कारण कोयला उत्पादन प्रभावित हुआ.

रामगढ़ में सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड के अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत बरका-सयाल क्षेत्र के महाप्रबंधक अजय कुमार सिंह ने कहा कि विभिन्न कोयला परियोजनाओं में कोयला उत्पादन और ढुलाई प्रभावित हुआ है. सीसीएल के रजरप्पा क्षेत्र के महाप्रबंधक कल्याणजी प्रसाद ने बताया कि हड़ताल का आंशिक असर रजरप्पा क्षेत्र में देखने को मिला.
हजारीबाग में बंद समर्थकों ने राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच)-33 को जोड़ने वाले जिला परिषद चौक को कुछ समय के लिए जाम कर दिया, लेकिन बाद में पुलिस ने उन्हें तितर-बितर कर दिया.

श्रमिक संघों के नेताओं ने दावा किया कि चरही इलाके में कोयला उत्पादन बुरी तरह प्रभावित हुआ है. हालांकि, हज़ारीबाग प्रशासन ने दावा किया कि हड़ताल का कोयला उत्पादन पर कोई असर नहीं पड़ा है. बोकारो जिले के बेरमो में बंद समर्थक रेलवे स्टेशन पर पटरियों पर बैठ गए और एक मालगाड़ी को रोकने की कोशिश की. प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद आंदोलनकारियों से पटरी खाली करा ली गई.

बंद समर्थकों ने पलामू जिले में कई स्थानों पर सड़कों पर यातायात को बाधित करने की कोशिश कीं. भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के राज्य सचिव महेंद्र पाठक ने कहा कि हड़ताल का आह्वान केंद्र सरकार की ‘मजदूर विरोधी नीतियों’ के खिलाफ किया गया है.

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