



Ranchi. भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता बाबूलाल मरांडी ने रविवार को आरोप लगाया कि झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) के माध्यम से सिविल सेवा अधिकारी की नौकरी पाने के लिए अभ्यर्थी को कुल 40 लाख रुपये की रिश्वत देनी पड़ती है। उन्होंने केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से इस मामले की जांच कराने की मांग की। विपक्ष के नेता मरांडी ने राज्य सरकार पर आरोप लगाया कि वह सीआईडी की जारी जांच की आड़ में मामले को दबाने की कोशिश कर रही है; इस जांच के तहत अब तक कम से कम 10 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। भाजपा पिछले कुछ दिनों से अप्रैल में आयोजित 14वीं जेपीएससी परीक्षा में कथित गड़बड़ी की जांच केंद्रीय एजेंसी से कराने की मांग कर रही है। वहीं, जेपीएससी ने मुख्य परीक्षा को स्थगित कर दिया है।
पूर्व मुख्यमंत्री मरांडी ने संवाददाताओं से कहा, “झारखंड लोक सेवा आयोग में अनियमितताओं के मामले में सीआईडी अब तक 10 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है और इसके अध्यक्ष एल. खियांग्ते ने इस्तीफा दे दिया है। ये कदम देखने में अच्छे लग सकते हैं, लेकिन वास्तव में सरकार कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रही है।”
पुलिस द्वारा आयोग कार्यालय में छापेमारी के बाद जेपीएससी अध्यक्ष के इस्तीफे की खबर करीब एक सप्ताह से चर्चा में थी, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पूर्व मुख्यमंत्री मरांडी ने कहा,भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी महज संयोग से नहीं होती, बल्कि इसे योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दिया जाता है। ऐसी गड़बड़ियों और भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने के लिए सरकार जानबूझकर ऐसे लोगों को महत्वपूर्ण पदों पर बैठाती है, जिनकी विश्वसनीयता खत्म हो चुकी है।”
उन्होंने कहा, “कर्नाटक के एक अभ्यर्थी ने जनवरी में जेपीएससी अध्यक्ष एल. खियांग्ते को पत्र लिखकर आयोग के अधिकारियों द्वारा कथित भ्रष्टाचार, अनियमितताओं और कदाचार की शिकायत की थी, लेकिन उन्होंने किसी के खिलाफ कार्रवाई नहीं की। यह गंभीर सवाल खड़ा करता है कि केवल इस्तीफा देकर वह खुद को कैसे अलग कर सकते हैं?” भाजपा नेता ने झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) नीत सरकार से मांग की कि खियांग्ते के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया जाए। अभ्यर्थी के पत्र का हवाला देते हुए मरांडी ने दावा किया कि अध्यक्ष को जानकारी थी कि प्रारंभिक परीक्षा पास कराने के लिए पांच लाख रुपये, मुख्य परीक्षा के लिए 25 लाख रुपये और साक्षात्कार के लिए 10 लाख रुपये की मांग की जाती है।
उन्होंने कहा, “कुल मिलाकर एक अभ्यर्थी को नौकरी पाने के लिए 40 लाख रुपये देने पड़ते हैं।” मरांडी ने सवाल उठाया कि अगर जेपीएससी जैसा संस्थान “भ्रष्टाचार का अड्डा” है तो राज्य को अच्छे चरित्र वाले अधिकारी कैसे मिलेंगे।


