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Maiyan Yojna गरीबों के लिए, पर कुछ चतुर-चालाक लोग कर रहे राशि की निकासी, ऐसे लोगों पर करेंगे कार्रवाई, झामुमो के 52वें स्थापना दिवस पर गिरिडीह में बोले CM Hemant

Giridih. सीएम हेमंत सोरेन और उनकी पत्नी गांडेय विधायक कल्पना सोरेन झामुमो के स्थापना दिवस कार्यक्रम में पहुंचे. यहां सीएम हेमंत सोरेन ने कहा कि नीति आयोग ने देश के चार सर्वश्रेष्ठ राज्यों में झारखंड का नाम रखा है जो अपनी आर्थिक व्यवस्था को मजबूत कर रहा है. हमने यहां के गरीब, किसान, आधी आबादी को अपने पैरों पर खड़ा करने का संकल्प लिया है .सीएम हेमंत सोरेन ने लोगों को कहा कि अभी थोड़ा सा महिलाओं के खाते में पैसा जाने से रुका है. हमें पता चला है कि इतना बड़ा पैसा जो हम राज्य की आधी आबादी को दे रहे हैं, तो कुछ चालक, चतुर, लोमड़ी, भेड़िया लोग पीछे के दरवाजे से वह पैसा निकालने का काम कर रहे हैं. कई लाख पुरुषों ने महिलाओं के नाम पर पैसा निकालने का काम किया है. यह दुर्भाग्य की बात है.

शुरुआती दौर में मंईयां योजना में एक हजार रुपये देने की घोषणा की थी. लेकिन हमने इस राशि को बढ़ाकर ढाई हजार कर दिया. हम बजट का आधा हिस्सा आधी आबादी के लिए खर्च कर रहे हैं. कुछ चतुर लोगों की नजर भी इस हिस्से पर है. जानकारी मिली है कि ये चतुर लोग फर्जी तरीके से राशि की निकासी कर रहे हैं. लेकिन ऐसा नहीं होने दिया जायेगा. मुख्यमंत्री गिरिडीह जिला झारखंड मुक्ति मोर्चा के 52वें स्थापना दिवस को संबोधित कर रहे थे. सोरेन ने कहा कि संघर्ष से ही गरीब-गुरबों को उनका हक मिलता है. हमें लड़ाई से अपना हक लेना होगा.

केंद्र सरकार झारखंड के साथ सौतेला व्यवहार कर रही है. प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए नाक रगड़वा दिया, लेकिन राशि नहीं दी. तब हमने अबुआ आवास योजना शुरू की, जिसका लाभ झारखंड के गरीब-गुरबों को मिल सकेगा. मुख्यमंत्री ने एकबार फिर दोहराया कि झारखंड का बकाया 1.36 लाख करोड़ रुपये नहीं मिले, तो खदानें बंद कर देंगे. यहां से एक छटाक भी खनिज नहीं ले जाने दिया जायेगा.

हेमंत सोरेन ने कहा कि केंद्र सरकार ने देश को ऐसे मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है, जहां उसे न ही विकास की चिंता है और न ही कोई कोशिश हो रही है. वर्तमान में देश की स्थिति ठीक नहीं है. महंगाई बढ़ गयी है. हर चीज पर टैक्स लगा दिया गया है. नमक से लेकर किताब, कलम, कॉपी तक महंगी हो गयी है. इस स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार ने लोगों को आर्थिक मदद देने का फैसला लिया ताकि उन्हें राहत मिल सके.

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