


New Delhi. झारखंड और छत्तीसगढ़ में नक्सल विरोधी अभियान के प्रमुख क्षेत्रों में IED विस्फोटों और हथियारों के बरामद होने के मामलों में ‘वृद्धि’ के बाद अलर्ट जारी किया गया है. अधिकारियों ने यह जानकारी दी. अधिकारियों ने बताया कि IED बरामद होने और विस्फोटों के मामलों में ऐसे समय में वृद्धि देखी गई है जब मार्च 2026 तक देश से वामपंथी उग्रवाद (LWE) को खत्म करने के केंद्र सरकार के लक्ष्य को पूरा करने के लिए नक्सलियों के क्षेत्रों में सुरक्षा बलों के अभियानों में तेजी आई है.अधिकारियों ने बताया कि इस तरह के ‘Smart IED’ का इस्तेमाल बढ़ने की आशंका है. RCIED को ‘प्रेशर ट्रिगर’ (पैर रखने से) या ‘कमांड’ (दो तारों को जोड़कर होने वाले) आईईडी विस्फोटों की तुलना में घातक माना जाता है क्योंकि नक्सली इनमें दूरी से विस्फोट कर सकते हैं.
अब RCIED से भी हमला कर रहे नक्सली
अधिकारियों ने बताया कि इस आरसीआईईडी (रिमोट कंट्रोल आईईडी) में दो खाली बीयर की बोतलें लगाई गई थीं, ताकि सैनिकों को कांच के टुकड़ों से गंभीर चोटें पहुंचाई जा सकें. इसके साथ ही पास के एक पेड़ के नीचे एक छोटा एंटीना भी रखा गया था, जो तार से जुड़ा था और इसमें दूर से ही विस्फोट किया जा सकता था. उन्होंने बताया कि सीआरपीएफ के आईईडी रोधी दल ने इस आईईडी को निष्क्रिय कर दिया. सीआरपीएफ ने इस तरह का पहला आरसीआईईडी जनवरी में बीजापुर जिले में एक पुल के नीचे से बरामद किया था. यह जमीन के नीचे छिपाकर रखा गया 50 किलोग्राम का आरसीआईईडी था.
सीधे वार नहीं करने की नक्सलियों की रणनीति
सुरक्षा प्रतिष्ठान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए सुरक्षा बल खासकर छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र के सुदूर जिलों में नए शिविर स्थापित कर रहे हैं. माओवादी अब आमने-सामने की मुठभेड़ों में शामिल नहीं होते क्योंकि उनके पास हथियार एवं गोला-बारूद की कमी है इसलिए वे सैनिकों को मारने या उन्हें घायल करने के लिए आईईडी का अधिक इस्तेमाल कर रहे हैं.
टीसीओसी अवधि करीब आने के बीच
अधिकारी ने बताया कि आईईडी संबंधी घटनाओं के विश्लेषण के दौरान इनकी संख्या में ‘काफी’ वृद्धि देखने को मिली है और इसलिए टीसीओसी अवधि करीब आने के बीच सुरक्षा बलों के लिए ‘हाई अलर्ट’ जारी किया गया है. माओवादी गर्मियों के महीनों में सुरक्षा बलों के खिलाफ हमले करने के लिए सामरिक जवाबी आक्रामक अभियान (TCOC) चलाते हैं, क्योंकि इस दौरान जंगल सूख जाते हैं और पेड़ों से पत्ते गिर जाते हैं जिससे सुरक्षा बलों की गतिविधियों पर दूर तक नजर रखी जा सकती है.
नक्सल घटनाओं में 25 प्रतिशत की वृद्धि
विश्लेषण रिपोर्ट में कहा गया है कि 2020-22 के दौरान नक्सलियों ने सुरक्षा बलों के शिविर के तीन से सात किलोमीटर के दायरे में आईईडी लगाए थे लेकिन अब (2023-24) सीआरपीएफ या अन्य बलों के शिविरों के तीन किलोमीटर से भी कम के दायरे में इन्हें लगाया जा रहा है. रिपोर्ट में कहा गया है कि 2020-2021 की तुलना में 2022-24 के दौरान इन घटनाओं में 25 प्रतिशत की वृद्धि हुई है.
सीआरपीएफ जवानों की मजबूत टुकड़ी एफओबी
एफओबी छोटी लेकिन सीआरपीएफ जवानों की मजबूत टुकड़ी होती है, जो नक्सलियों की आपूर्ति लाइन काटने का कार्य करती है. साथ ही प्रभावित इलाकों में न केवल अभियान चलाती है बल्कि स्थानीय लोगों से संवाद भी करती है. केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) द्वारा पिछले सप्ताह छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले से पांच किलोग्राम का प्रेशर कुकर आईईडी बरामद किए जाने के बाद नक्सल विरोधी अभियान ग्रिड विशेष रूप से चिंतित है.
2024 में छत्तीसगढ़ में 78 बड़े आईईडी विस्फोट
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 2024 में छत्तीसगढ़ में 78 बड़े आईईडी विस्फोट हुए और हथियार बरामद किए गए. इन विस्फोटों में आठ सुरक्षाकर्मी मारे गए. अधिकारियों ने कहा कि राज्य में आईईडी संबंधी ये घटनाएं मार्च के मध्य तक 100 को पार कर गई हैं जिससे ऐसे समय में नक्सलियों के बढ़ते खतरे का पता चलता है जब सुरक्षा बल मार्च 2026 की समय सीमा के बीच अभियान चला रहे हैं. पिछले एक वर्ष में दोनों राज्यों में सुरक्षा बलों ने 70 से अधिक एफओबी स्थापित किए हैं जिनमें से अधिकतम सीआरपीएफ द्वारा बनाए गए हैं. CRPF नक्सल विरोधी अभियान चलाने वाला अग्रणी बल है.



