जमशेदपुर,: औद्योगिक मशीनों और संरचनाओं को अधिक सुरक्षित, विश्वसनीय और टिकाऊ बनाने के उद्देश्य से राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (NIT) जमशेदपुर में शुक्रवार को पांच दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला SIMPLE 2026 का शुभारंभ हुआ। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डिजिटल ट्विन, मशीन लर्निंग और अत्याधुनिक परीक्षण तकनीकों के जरिए औद्योगिक उपकरणों की कार्यक्षमता तथा सेवा अवधि बढ़ाने पर विशेषज्ञ मंथन करेंगे।

एनआईटी जमशेदपुर के धातुकर्म एवं पदार्थ अभियांत्रिकी विभाग द्वारा इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मेटल्स (IIM), जमशेदपुर चैप्टर के सहयोग से आयोजित यह कार्यशाला 3 नवंबर तक चलेगी।

डायमंड जुबली लेक्चर हॉल कॉम्प्लेक्स में आयोजित उद्घाटन समारोह में शिक्षाविदों, वैज्ञानिकों, उद्योग विशेषज्ञों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने भाग लिया।
औद्योगिक मशीनों में खराबी की पहचान के लिए वैज्ञानिक जांच जरूरी
उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि डॉ. ओंकार नाथ मोहंती ने Integrity of Engineering Components – View from a Window विषय पर व्याख्यान दिया।उन्होंने बताया कि औद्योगिक मशीनों और संरचनाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए धातुओं के व्यवहार, आंतरिक तनाव और संभावित खराबी का वैज्ञानिक मूल्यांकन जरूरी है।उन्होंने अवशिष्ट तनाव (Residual Stress) और बार-बार पड़ने वाले भार के कारण धातुओं में होने वाली थकानजनित विफलता (Fatigue Failure) जैसे विषयों पर चर्चा की।
XRD और अल्ट्रासोनिक परीक्षण से पता चलेगी मशीनों की स्थिति
डॉ. मोहंती ने एक्स-रे विवर्तन (XRD), अल्ट्रासोनिक परीक्षण, होल-ड्रिलिंग तकनीक और मैग्नेटिक बार्कहाउज़ेन नॉइज़ जैसी आधुनिक जांच विधियों की उपयोगिता बताई।उन्होंने कहा कि इन तकनीकों के जरिए औद्योगिक उपकरणों में मौजूद तनाव, संभावित दोष और उनकी स्थिति का वैज्ञानिक आकलन किया जा सकता है।इसके साथ ही शॉट पीनिंग जैसी सतह उपचार तकनीक के माध्यम से धातुओं की थकान प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के उपायों की जानकारी दी।
AI, मशीन लर्निंग और डिजिटल ट्विन पर होगा विशेष फोकस
पांच दिवसीय कार्यशाला में औद्योगिक उपकरणों की खराबी का विश्लेषण, पदार्थों में क्षरण, गैर-विनाशकारी परीक्षण (NDT), कंप्यूटर सिमुलेशन और डिजिटल ट्विन तकनीक पर तकनीकी सत्र आयोजित किए जाएंगे।
विशेषज्ञ बताएंगे कि AI और मशीन लर्निंग की सहायता से उपकरणों की संभावित खराबी का पूर्वानुमान लगाने और उनकी शेष उपयोगी आयु का आकलन करने में किस तरह मदद मिल सकती है।
इस दौरान वास्तविक औद्योगिक उदाहरणों के आधार पर सुरक्षित रखरखाव और संरचनात्मक विश्वसनीयता बढ़ाने के उपायों पर भी चर्चा होगी।
टाटा स्टील, CSIR-NML और DMRL के विशेषज्ञ साझा करेंगे अनुभव
कार्यशाला के आगामी सत्रों में टाटा स्टील, सीएसआईआर-राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला (CSIR-NML), रक्षा धातुकर्म अनुसंधान प्रयोगशाला (DMRL), हैदराबाद तथा एनआईटी जमशेदपुर के विशेषज्ञ अपने तकनीकी अनुभव साझा करेंगे।
कार्यशाला का उद्देश्य उद्योगों और शैक्षणिक संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाना तथा अनुसंधान को औद्योगिक जरूरतों से जोड़ना है।
3 नवंबर को होगा कार्यशाला का समापन
इस कार्यशाला का आयोजन एनआईटी जमशेदपुर के निदेशक प्रो. गौतम सूत्रधार के मुख्य संरक्षण, प्रो. अशोक कुमार के संरक्षण और डॉ. सी. एस. चौधरी की अध्यक्षता में किया जा रहा है।डॉ. प्रकाश सरकार और डॉ. मोनालिसा मंडल संयोजक हैं, जबकि डॉ. राम कृष्ण और डॉ. अरविंद गली आयोजन सचिव की भूमिका निभा रहे हैं।कार्यक्रम को इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मेटल्स, जमशेदपुर चैप्टर और जैन साइंटिफिक सॉल्यूशंस का सहयोग प्राप्त है।
SIMPLE 2026 का समापन 3 नवंबर को तकनीकी सत्रों, प्रायोजकों की प्रस्तुतियों और समापन समारोह के साथ होगा।

