


New Delhi. पश्चिम एशिया संकट के बीच कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आने के बावजूद पेट्रोलियम उत्पादों की खुदरा कीमतें स्थिर रहने से तेल विपणन कंपनियों को पेट्रोल एवं डीजल की बिक्री पर क्रमशः 14 रुपये एवं 18 रुपये प्रति लीटर का नुकसान उठाना पड़ रहा है। बुधवार को एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई। रेटिंग एजेंसी इक्रा ने कहा कि यदि कच्चे तेल की कीमत 120-125 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर बनी रहती है, तो पेट्रोलियम कंपनियों का विपणन मार्जिन आगे भी नकारात्मक बना रहेगा, जिससे कंपनियों की लाभप्रदता प्रभावित हो रही है। इधर केंद्र सरकार ने कीमतों में वृद्धि से इनकार किया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, पेट्रोल-डीजल के अलावा रसोई गैस (एलपीजी) पर भी भारी ‘अंडर-रिकवरी’ यानी नुकसान होने की आशंका है, जो वित्त वर्ष 2026-27 में करीब 80,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है। वहीं, इस अवधि में उर्वरक सब्सिडी बढ़कर 2.05 लाख करोड़ से 2.25 लाख करोड़ रुपये के बीच पहुंच जाने का अनुमान है, जो 1.71 लाख करोड़ रुपये के बजट अनुमान से काफी अधिक है।
इक्रा ने कहा कि करीब 20 प्रतिशत वैश्विक तेल एवं गैस आपूर्ति वाले समुद्री मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य में आपूर्ति बाधाओं के कारण ईंधन, उर्वरक और रसायनों की उपलब्धता प्रभावित हुई है। इससे कीमतों में वृद्धि और तेल रिफाइनरी और विपणन कंपनियों पर लागत दबाव बढ़ा है। फरवरी अंत में पश्चिम एशिया संकट शुरू होने से पहले कच्चे तेल की कीमत 70-72 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर थी, जो 100 डॉलर प्रति बैरल से अधिक है।



