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Railway: देशभर में रेलवे लोको पायलटों की 48 घंटे की भूख हड़ताल शुरू, ड्यूटी पर रहते हुए ट्रेनों में कर रहे उपवास, जानें क्या है मांगें?

New Delhi. अखिल भारतीय लोको रनिंग स्टाफ संघ के आह्वान पर मंगलवार से देशभर के सभी लोको पायलट और सहायक लोको पायलटों ने अपने-अपने डिवीजनल मुख्यालयों पर 48 घंटे की भूख हड़ताल शुरू कर दी है. इसी क्रम में ऑल इंडिया रनिंग स्टाफ एसोसिएशन ने प्रदर्शन करते हुए अपनी नौ सूत्री मांगें सरकार के समक्ष रखीं. प्रदर्शन कर रहे लोको पायलटों का कहना है कि रेलवे तय नियमों के खिलाफ जाकर अतिरिक्त ट्रेनों का संचालन और लंबी ड्यूटी करवा रही है. यह नियमों की स्पष्ट अनदेखी है, और यदि सरकार ने उनकी मांगों पर सकारात्मक कदम नहीं उठाया, तो आंदोलन को और आगे बढ़ाया जाएगा.

इससे पहले रेलवे में लोको पायलट के एक प्रमुख यूनियन ने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को पत्र लिखकर घोषणा की थी कि उनकी मांगों के प्रति मंत्रालय की कथित ‘उदासीनता’ के विरोध में दो दिसंबर को पूर्वाह्न 10 बजे से पूरे भारत में कर्मचारी अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए 48 घंटे का अनशन करेंगे.

‘ऑल इंडिया लोको रनिंग स्टाफ एसोसिएशन’ (एआईएलआरएसए) ने अन्य मांगों के अलावा दैनिक ड्यूटी की सीमा आठ घंटे, 46 घंटे का साप्ताहिक अवकाश, सप्ताह में चार के बजाय केवल दो लगातार रात्रि ड्यूटी और रिक्त पदों को भरने की मांग कर रहा है. एआईएलआरएसए के महासचिव के सी जेम्स ने रेल मंत्री वैष्णव और रेलवे बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सतीश कुमार को संबोधित पत्र में कहा, ‘यह अनशन कोई विद्रोह नहीं, बल्कि न्याय और निष्पक्षता की पुकार है – यह पीड़ा की अभिव्यक्ति है, अवज्ञा की नहीं. लोको रनिंग स्टाफ ने हर संकट में हमेशा रेलवे प्रशासन का साथ दिया है और कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी देश की जीवनरेखा को गतिमान रखा है.’ जेम्स ने कहा, ‘लेकिन आज, वे अपनी आवाज बुलंद करने के लिए यह कदम उठाने को मजबूर हैं.

एसोसिएशन को पूरी उम्मीद है कि क्षेत्रीय प्रशासन उपरोक्त मुद्दों को रेलवे बोर्ड के समक्ष उठाएगा और उचित निर्णय लेगा.’
यूनियन का आरोप है कि लोको पायलट को 16 घंटे के दैनिक विश्राम और 30 घंटे के साप्ताहिक अवकाश से वंचित किया जा रहा है. इसके अलावा, उन्हें ‘‘अनुशासनात्मक कार्रवाई की धमकी देकर असीमित घंटे काम करने के लिए मजबूर’’ किया जा रहा है. पत्र में शिकायत की गई कि जहां अन्य कर्मचारियों को सप्ताह में केवल दो रात्रि पाली में काम करना पड़ता है, वहीं लोको पायलट को मौजूदा मानदंडों के विपरीत लगातार चार रात्रि ड्यूटी लगाई जाती है.

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