



New Delhi. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शुक्रवार को राज्यसभा में कहा कि रेल सुरक्षा बल (आरपीएफ) को भारतीय न्याय संहिता के प्रावधानों के तहत मामले दर्ज करने का अधिकार नहीं है। रेल मंत्री वैष्णव ने एक सवाल के लिखित जवाब में राज्यसभा को यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि रेलवे सुरक्षा बल को भारतीय न्याय संहिता के प्रावधानों के तहत मामले दर्ज करने का अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि आरपीएफ को रेलवे संपत्ति (गैर-कानूनी कब्जा) अधिनियम, 1966 और रेलवे अधिनियम, 1989 के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज करने का अधिकार है। ये कानून रेलवे संपत्ति की चोरी, गैर-कानूनी कब्जे आदि से संबंधित हैं।
वैष्णव ने कहा, पुलिस और सार्वजनिक व्यवस्था संविधान की सातवीं अनुसूची के तहत राज्य के विषय हैं और इसलिए राज्य सरकारें कानून लागू करने वाली अपनी एजेंसियों यानी जीआरपी/ज़िला पुलिस के माध्यम से रेलवे पर अपराध की रोकथाम, पंजीकरण, जांच और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए ज़िम्मेदार हैं।’’
उन्होंने कहा कि जीआरपी के वेतन खर्च का 50 प्रतिशत रेलवे उठाता है। रेल मंत्री ने कहा कि जीआरपी, जिला पुलिस और आरपीएफ की भूमिका और जिम्मेदारियां स्पष्ट रूप से तय हैं और भारतीय न्याय संहिता के तहत अपराध के सभी मामले संबंधित राज्यों या केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा तय किए गए अधिकार क्षेत्र के अनुसार जीआरपी या ज़िला पुलिस द्वारा दर्ज और जांच किए जाते हैं। वैष्णव के अनुसार, आरपीएफ यात्रियों और यात्री क्षेत्रों की बेहतर सुरक्षा और संरक्षा प्रदान करने के लिए जीआरपी/ज़िला पुलिस के प्रयासों में मदद करता है।


