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RBI ने रेपो दर को आधा प्रतिशत घटाया, महंगाई दर में नरमी के बीच लगातार तीसरी बार की कटौती, घर, वाहनों के कर्जे पर घटेगी EMI

Mumbai. महंगाई दर में नरमी के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने शुक्रवार को आर्थिक वृद्धि को गति देने के मकसद से प्रमुख नीतिगत दर रेपो को उम्मीद से अधिक 0.5 प्रतिशत घटाकर 5.5 प्रतिशत कर दिया. केंद्रीय बैंक ने लगातार तीसरी बार रेपो दर में कटौती की है. इसके साथ आरबीआई ने बैंकों के लिए अप्रत्याशित रूप से नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) में भी एक प्रतिशत की कटौती की घोषणा की। इन उपायों से वैश्विक स्तर पर जारी चुनौतियों के बीच अर्थव्यवस्था को जरूरी समर्थन मिलेगा.

आरबीआई ने यह कदम ऐसे समय उठाया है जब मुद्रास्फीति अप्रैल में घटकर लगभग छह साल के निचले स्तर 3.16 प्रतिशत और आर्थिक वृद्धि दर 2024-25 में चार साल के न्यूनतम स्तर 6.5 प्रतिशत पर आ गयी है. चालू वित्त वर्ष की दूसरी द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा पेश करते हुए आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा, ‘‘उभरती वृहद आर्थिक, वित्तीय गतिविधियों और आर्थिक परिदृश्य पर गौर करने के बाद छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने रेपो दर में 0.50 प्रतिशत कटौती करने का निर्णय किया है.समिति के पांच सदस्यों ने नीतिगत दर में कटौती के पक्ष में मतदान किया.

उन्होंने कहा कि इसके साथ ही, नकद आरक्षित अनुपात को भी एक प्रतिशत घटाकर तीन प्रतिशत कर दिया गया है. इससे बैंकों के पास नकदी में 2.5 लाख करोड़ रुपये की वृद्धि होगी. इस कटौती के साथ रेपो दर तीन साल के निचले स्तर 5.5 प्रतिशत पर आ गयी है. इससे मकान, वाहन समेत विभिन्न कर्ज पर मासिक किस्त (ईएमआई) में कमी आ सकती है जिससे लोगों को राहत मिलेगी. रेपो वह ब्याज दर है, जिस पर वाणिज्यिक बैंक अपनी तात्कालिक जरूरतों को पूरा करने के लिये केंद्रीय बैंक से कर्ज लेते हैं.

इससे पहले, पांच अगस्त, 2022 को यह 5.40 प्रतिशत के स्तर पर थी. आरबीआई इस साल फरवरी से लेकर अबतक रेपो दर में एक प्रतिशत की कटौती कर चुका है. इस साल फरवरी और अप्रैल की मौद्रिक नीति समीक्षा में रेपो दर में 0.25-0.25 प्रतिशत की कटौती की थी.आरबीआई ने मौद्रिक नीति रुख को उदार से बदलकर तटस्थ कर दिया है. इसका मतलब है कि केंद्रीय बैंक आर्थिक स्थिति के हिसाब से नीतिगत दर में समायोजन को लेकर लचीला बना रहेगा. मल्होत्रा ने कहा, रेपो दर में एक प्रतिशत की कटौती के बाद, मौद्रिक नीति के पास वृद्धि को समर्थन देने के लिए अब सीमित गुंजाइश बची है.’

रेपो दर में कटौती के बाद स्थायी जमा सुविधा (एसडीएफ) 5.25 प्रतिशत और सीमांत स्थायी सुविधा तथा बैंक दर 5.75 प्रतिशत हो गयी है. आरबीआई ने 2025-26 के लिए सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर के अनुमान को 6.5 प्रतिशत पर बरकरार रखा है. वहीं चालू वित्त वर्ष के लिए खुदरा मुद्रास्फीति के अनुमान को चार प्रतिशत से घटाकर 3.7 कर दिया गया है.

नीतिगत दर में कटौती के कारण का जिक्र करते हुए मल्होत्रा ने कहा, ‘पिछले छह महीनों में मुद्रास्फीति में काफी नरमी आई है। यह अक्टूबर, 2024 में संतोषजनक स्तर से ऊपर थी और अब यह व्यापक आधार पर नरमी के संकेत के साथ लक्ष्य से काफी नीचे आ गई है.

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