



New Delhi.केंद्रीय मंत्रिमंडल ने प्रश्नपत्र लीक के मामलों में कड़ी सजा का प्रावधान सुनिश्चित करने के लिए एक विधेयक के मसौदे को शुक्रवार को मंजूरी दे दी। इसमें 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान भी शामिल है। आधिकारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बृहस्पतिवार को घोषणा की थी कि अगले हफ्ते संसद में एक विधेयक पेश किया जाएगा, जिसमें प्रश्नपत्र लीक के खिलाफ सख्त प्रावधान होंगे। इस घोषणा के कुछ घंटे बाद मंत्रिमंडल ने मसौदे को मंजूरी दी।
सूत्रों ने बताया कि संसद भवन परिसर में प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में प्रश्नपत्र लीक के मामलों में शामिल लोगों को मौजूदा कानूनों की तुलना में अधिक कड़ी सजा देने का प्रावधान करने के लिए एक विधेयक के मसौदे को मंजूरी दी गई। सूत्रों ने बताया कि इस विधेयक के जरिये ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) विधेयक, 2024’ में संशोधन किया जायेगा। इसमें प्रश्नपत्र लीक में शामिल व्यक्तियों के लिए कम से कम पांच साल की जेल की सजा और/या जुर्माने का प्रस्ताव किया गया है।
सूत्रों के अनुसार इसमें संगठित तरीके से किए गए प्रश्नपत्र लीक के मामलों में 10 साल तक की जेल की सजा और अधिकतम 10 करोड़ रुपये के जुर्माने का प्रावधान प्रस्तावित किया गया है।
मौजूदा कानून में व्यक्तिगत रूप से शामिल लोगों के लिए तीन से पांच साल तक की कैद का प्रावधान है, जबकि संगठित रूप से धोखाधड़ी और प्रश्नपत्र लीक जैसे अपराधों में शामिल लोगों के लिए पांच से 10 साल तक की कैद और कम से कम एक करोड़ रुपये के जुर्माने का प्रावधान है। इस विधेयक का उद्देश्य उन संगठित गिरोहों और संस्थानों को गलत कृत्य करने से रोकना है, जो आर्थिक लाभ के लिए अनुचित साधनों का सहारा लेते हैं। साथ ही अभ्यर्थियों को इसके प्रावधानों से संरक्षण प्रदान करना है।
मौजूदा कानून का उद्देश्य यूपीएससी, एसएससी आदि जैसी भर्ती परीक्षाओं और नीट, जेईई तथा सीयूईटी जैसी प्रवेश परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक, कदाचार और संगठित कदाचार पर रोक लगाना है। सूत्रों ने बताया कि सरकार राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) में सुधारों से जुड़े सभी मुद्दों पर भी काम कर रही है। एनटीए चिकित्सा प्रवेश के लिए राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (स्नातक) यानी नीट-यूजी आयोजित करती है।


