सरायकेला–खरसावाँ: 28 अप्रैल 2026 को समाहरणालय सभागार में उपायुक्त की अध्यक्षता में जिला स्तरीय शुल्क निर्धारण समिति की पहली बैठक आयोजित हुई। इस महत्वपूर्ण बैठक में शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाने, अभिभावकों को राहत देने और निजी विद्यालयों की मनमानी पर रोक लगाने को लेकर कई बड़े फैसले लिए गए।
फीस वृद्धि पर नियंत्रण: अधिकतम 10% की सीमा तय
बैठक में निर्णय लिया गया कि जिले के सभी निजी विद्यालय अब अधिकतम 10% तक ही फीस बढ़ा सकेंगे। इससे अधिक बढ़ोतरी के लिए जिला स्तरीय समिति की पूर्व अनुमति अनिवार्य होगी। साथ ही यह भी तय किया गया कि एक बार फीस बढ़ाने के बाद कम से कम दो वर्षों तक दोबारा वृद्धि नहीं की जा सकेगी।
विद्यालयों को निर्देश दिया गया है कि वे पिछले तीन शैक्षणिक सत्रों और सत्र 2026-27 की कक्षावार शुल्क विवरणी समिति को उपलब्ध कराएं, ताकि निगरानी और पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।
अभिभावकों को राहत: अवैध वसूली पर सख्त कार्रवाई
प्रशासन ने स्पष्ट किया कि किसी भी विद्यालय को प्रवेश, पुनः नामांकन या अन्य किसी भी नाम पर अतिरिक्त या अवैध शुल्क वसूलने की अनुमति नहीं होगी। यदि ऐसी शिकायतें मिलती हैं, तो संबंधित विद्यालयों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
इसके अलावा, स्कूल अब अभिभावकों को किसी खास दुकान से किताबें, कॉपियां या यूनिफॉर्म खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकेंगे। यह कदम अभिभावकों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को कम करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
शुल्क समिति और PTA गठन अनिवार्य
बैठक में सभी निजी विद्यालयों में शुल्क समिति और अभिभावक-शिक्षक संघ (PTA) का गठन अनिवार्य करने का निर्देश दिया गया। साथ ही इन समितियों की जानकारी स्कूल की वेबसाइट और नोटिस बोर्ड पर सार्वजनिक करने को कहा गया है, ताकि पारदर्शिता बनी रहे।जिन विद्यालयों में अभी तक ये समितियां नहीं बनी हैं, उन्हें जल्द से जल्द गठन कर सूचना उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए।
स्कूल वाहनों में सुरक्षा नियमों का कड़ाई से पालन
छात्रों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उपायुक्त ने निर्देश दिया कि किसी भी विद्यालय वाहन में निर्धारित क्षमता से अधिक बच्चों को नहीं बैठाया जाएगा। सभी स्कूलों को परिवहन और सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन करना होगा।
इसके साथ ही बाहरी वाहनों की निगरानी और छात्रों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने पर भी जोर दिया गया।
RTE के तहत नामांकन और सख्त निगरानी के निर्देश
उपायुक्त ने जिला शिक्षा पदाधिकारी को निर्देश दिया कि सभी विद्यालय एक सप्ताह के भीतर शुल्क का पूरा ब्रेकअप उपलब्ध कराएं। साथ ही राइट टू एजुकेशन (RTE) के तहत पात्र बच्चों का नामांकन सुनिश्चित करने को भी कहा गया।
प्रशासन ने साफ किया कि राज्य सरकार के दिशा-निर्देशों का पालन नहीं करने वाले विद्यालयों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर
उपायुक्त ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और अभिभावकों के हितों की सुरक्षा प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। किसी भी प्रकार की अनियमितता या लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
