
Ranchi. झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने सोमवार को कहा कि राज्य सरकार एक महीने तक चलने वाले श्रावणी मेले के दौरान श्रद्धालुओं को चौबीसों घंटे स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए देवघर में 228 से अधिक चिकित्सकों और 400 पैरामेडिकल कर्मियों की तैनाती करेगी। अंसारी ने वार्षिक मेले की तैयारियों की समीक्षा करते हुए कहा कि 30 जुलाई से शुरू होने वाले इस आयोजन के दौरान देवघर सदर अस्पताल, रेफरल अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और उप-स्वास्थ्य केंद्रों समेत 41
स्वास्थ्य संस्थान 24 घंटे कार्यरत रहेंगे। उन्होंने बताया कि श्रद्धालुओं के लिए देवघर सदर अस्पताल में 100 बिस्तर और एम्स, देवघर में 50 बिस्तर आरक्षित रखे गए हैं। मंत्री ने एक बयान में कहा, “सभी अस्पतालों को आपातकालीन सेवा, ट्रॉमा, गहन चिकित्सा इकाई (आईसीयू), ब्लड बैंक, सीटी स्कैन, अल्ट्रासाउंड, पैथोलॉजी और रेफरल सेवाओं को पूरी क्षमता के साथ संचालित करने का निर्देश दिया गया है।”
अंसारी ने स्वास्थ्य तैयारियों, आपातकालीन प्रतिक्रिया व्यवस्था, कांवड़िया मार्ग पर चिकित्सा सुविधाओं, खाद्य सुरक्षा, स्वच्छता और देवघर, दुमका तथा जामताड़ा जिलों के बीच समन्वय की समीक्षा की।
उन्होंने कहा, “राज्य सरकार स्वास्थ्य आपात स्थितियों को लेकर कतई बर्दाश्त नहीं करने की नीति पर काम कर रही है। हमारा संकल्प है कि श्रावणी मेले के दौरान किसी भी श्रद्धालु को स्वास्थ्य सेवाओं की कमी के कारण परेशानी न हो।”
आपदा प्रबंधन विभाग का प्रभार भी संभाल रहे अंसारी ने बताया कि 105 किलोमीटर लंबे कांवड़िया मार्ग पर नियमित अंतराल पर चिकित्सा शिविर लगाए गए हैं, जहां चिकित्सक, कर्मचारी, नर्स, एएनएम, फार्मासिस्ट और पैरामेडिकल कर्मी चौबीसों घंटे उपलब्ध रहेंगे। उन्होंने कहा कि लू लगने, निर्जलीकरण, संक्रमण, सर्पदंश और अन्य आपात स्थितियों से निपटने के लिए दवाओं, ऑक्सीजन, जीवन रक्षक इंजेक्शन, ओआरएस और अन्य जरूरी चिकित्सा सामग्री का पर्याप्त भंडार रखा गया है। हर साल श्रावण महीने में देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम मंदिर में पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं।
श्रद्धालु बिहार के सुल्तानगंज से पवित्र गंगाजल लेकर पैदल 105 किलोमीटर की यात्रा शुरू करते हैं और इसे वैद्यनाथ धाम मंदिर में शिवलिंग पर अर्पित करते हैं। औसतन 35 से 40 लाख श्रद्धालु इस वार्षिक मेले में शामिल होते हैं, जिसके लिए झारखंड और बिहार सरकार मिलकर व्यवस्थाएं करती हैं।
