

Nemra. झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन का मंगलवार को उनके पैतृक गांव नेमरा में पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया. इस मौके पर हजारों लोगों ने ‘दिशोम गुरु’ को नम आखों से अंतिम विदाई दी जिनमें ग्रामीण, राजनीतिक हस्तियां और समाज के सभी वर्गों के लोग शामिल थे. शिबू सोरेन को लोग प्यार से ‘दिशोम गुरु’ (भूमि के नेता) कहते थे. उनका सोमवार को 81 वर्ष की आयु में दिल्ली के एक निजी अस्पताल में गुर्दे संबंधी बीमारी के इलाज के दौरान निधन हो गया था. झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के सह संस्थापक और राज्य के आदिवासी आंदोलन का प्रमुख चेहरा रहे शिबू सोरेन को झारखंड सशस्त्र पुलिस (जेएपी) के जवानों ने सलामी दी. उनका कड़ी सुरक्षा के बीच पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया.

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनके बड़े पुत्र ने जब चिता को मुखाग्नि दी तब ‘गुरुजी अमर रहें’ के नारे गूंज उठे. रामगढ़ जिले के नेमरा में गमगीन माहौल था, जहां परिवार, समर्थक, राजनीतिक नेता और ग्रामीण सहित हजारों लोग नम आंखों से अंतिम विदाई देने के लिए एकत्र हुए थे.


लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो सके, क्योंकि उनका हेलीकॉप्टर रांची से उड़ान नहीं भर सका, जहां वे दिल्ली से अपराह्न करीब 3.30 बजे उतरे. हालांकि, कांग्रेस के दोनों वरिष्ठ नेता सड़क मार्ग से नेमरा के लिए रवाना हुए और शाम करीब 6.45 बजे हेमंत सोरेन से मिलने पहुंचे और उन्हें सांत्वना दी. बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) नेता तेजस्वी यादव भी नेमरा पहुंचे, जबकि पूर्व केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा और ऑल झारखंड स्टुडेंट्स यूनियन (आजसू) पार्टी प्रमुख सुदेश महतो सड़कों पर भारी यातायात जाम की वजह से मोटरसाइकिल से नेमरा पहुंचे.
जब दिग्गज आदिवासी नेता के पार्थिव शरीर को पूरे आदिवासी रीति-रिवाज के साथ गांव में उनके पैतृक घर पर फूलों से सजी चारपाई पर रखा गया, तो उनके करीबी और प्रियजन कफन, चादर, शॉल और गुलदस्ते चढ़ाने के लिए उमड़ पड़े. शिबू सोरेन के पार्थिव शरीर को जिस ताबूत में रखा गया था , उसे तिरंगे और झामुमो के झंडे में लपेटा गया था.
व्हीलचेयर पर बैठी शिबू सोरेन की पत्नी रूपी सोरेन अपने आंसू नहीं रोक पा रही थीं, जबकि उनके पुत्र मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और विधायक बसंत सोरेन तथा विधायक बहू कल्पना सोरेन शांतचित्त थे और उनके चेहरे पर गहरे दुख का भाव साफ देखा जा सकता था. कल्पना सोरेन अपने दोनों बेटों को सांत्वना देती नजर आईं. सोरेन का पैतृक आवास अंतिम दर्शन के लिए आए लोगों से भरा हुआ था और कई लोग अपने आंसू नहीं रोक पा रहे थे.



