
New Delhi. टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन नोएल टाटा और टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन सहित टाटा समूह के शीर्ष अधिकारियों ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात की. यह मुलाकात निदेशक मंडल (बोर्ड) नियुक्तियों और कॉरपोरेट संचालन संबंधी मुद्दों पर न्यासियों के बीच जारी विवाद की पृष्ठभूमि में हुई. नोएल टाटा और चंद्रशेखरन, टाटा ट्रस्ट के उपाध्यक्ष वेणु श्रीनिवासन और ट्रस्टी डेरियस खंबाटा के साथ शाम को शाह के आवास पर बैठक के लिए पहुंचे. सीतारमण भी गृह मंत्री के आवास पर बैठक में शामिल हुईं. टाटा ट्रस्ट के न्यासियों के बीच जारी विवादों से 180 अरब डॉलर से अधिक के इस समूह के कामकाज पर असर पड़ने का खतरा है. टाटा ट्रस्ट की नमक से लेकर सेमीकंडक्टर तक बनाने वाले समूह की प्रवर्तक और होल्डिंग कंपनी टाटा संस में लगभग 66 प्रतिशत हिस्सेदारी है. सूत्रों ने बताया कि टाटा ट्रस्ट में दो गुट हैं, एक हिस्सा नोएल टाटा के साथ जुड़ा है, जिन्हें रतन टाटा के निधन के बाद ट्रस्ट का चेयरमैन बनाया गया था. चार न्यासियों के दूसरे समूह का नेतृत्व मेहली मिस्त्री करते हैं, जिनका संबंध शापूरजी पलोनजी परिवार से है. इस परिवार के पास टाटा संस में लगभग 18.37 प्रतिशत हिस्सेदारी है. मिस्त्री को कथित तौर पर लगता है कि उन्हें महत्वपूर्ण मामलों से दूर रखा गया है.
सूत्रों ने बताया कि विवाद का मुख्य बिंदु टाटा संस के बोर्ड में पद को लेकर है, जो 156 साल पुराने समूह को नियंत्रित करता है. इस समूह में 30 सूचीबद्ध फर्मों सहित लगभग 400 कंपनियां शामिल हैं. टाटा ट्रस्ट, टाटा संस और वेणु श्रीनिवासन ने इस मामले पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया और मेहली मिस्त्री की टिप्पणी खबर लिखे जाने तक नहीं मिल सकी थी. मिस्त्री ने कॉल और संदेशों का कोई जवाब नहीं मिला.
निदेशक मंडल में नियुक्ति और कंपनी संचालन को लेकर मतभेद
टाटा संस में करीब 66 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाले टाटा ट्रस्ट्स के सदस्यों के बीच निदेशक मंडल में नियुक्ति और कंपनी संचालन से संबंधित मुद्दों को लेकर आपसी मतभेद उभर आए हैं. सूत्रों ने मंगलवार को यह जानकारी दी. सूत्रों ने कहा कि टाटा ट्रस्ट्स के भीतर एक तरह से दो गुट बन गए हैं. एक गुट की कमान नोएल टाटा के पास है जो रतन टाटा के निधन के बाद चेयरमैन बने थे. वहीं चार सदस्यों वाले दूसरे गुट की कमान मेहली मिस्त्री के पास है. मिस्त्री के संबंध शापूरजी पलोनजी परिवार से हैं जिसकी टाटा संस में करीब 18.37 प्रतिशत हिस्सेदारी है. सूत्रों के मुताबिक, इस विवाद का मुख्य कारण टाटा संस के निदेशक मंडल में नियुक्ति है. टाटा संस ही 156 वर्ष पुराने समूह का नियंत्रण करती है. समूह के भीतर 30 सूचीबद्ध कंपनियों सहित लगभग 400 कंपनियां हैं.
11 सितंबर की बैठक में विवाद की शुरुआत
सूत्रों ने बताया कि 11 सितंबर को हुई बैठक में इस विवाद की शुरुआत हुई थी, जिसमें टाटा संस के निदेशक मंडल में पूर्व रक्षा सचिव विजय सिंह की पुनर्नियुक्ति पर विचार किया गया था. सात में से छह ट्रस्टी की बैठक में चार ट्रस्टी मेहली मिस्त्री, प्रमीत झावेरी, जहांगीर एचसी जहांगीर और डेरियस खंबाटा ने प्रस्ताव का विरोध किया था जिससे यह रद्द हो गया था. हालांकि नोएल टाटा और वेणु श्रीनिवासन ने इस पुनर्नियुक्ति का समर्थन किया था. बैठक के बाद चार ट्रस्टीज ने मेहली मिस्त्री को टाटा संस बोर्ड में नामित करने का प्रस्ताव रखा, लेकिन इस पर भी सहमति नहीं बन सकी. इसके बाद विजय सिंह ने स्वेच्छा से बोर्ड से इस्तीफा दे दिया.
अगली बोर्ड बैठक का एजेंडा स्पष्ट नहीं
टाटा ट्रस्ट्स की अगली बोर्ड बैठक 10 अक्टूबर को प्रस्तावित है, हालांकि उसका एजेंडा स्पष्ट नहीं है. इस बारे में संपर्क किए जाने पर टाटा ट्रस्ट्स, टाटा संस और वेणु श्रीनिवासन ने कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया. वहीं मिस्त्री से कोई संपर्क नहीं किया जा सका. इस बीच, सूत्रों का कहना है कि ट्रस्ट्स के भीतर का यह टकराव देश के सबसे बड़े औद्योगिक समूह पर असर डाल सकता है और सरकार की दखल की जरूरत महसूस की जाने लगी है. एक सूत्र ने कहा, “टाटा समूह के महत्व को देखते हुए यह प्रश्न उठ रहा है कि क्या समूह का नियंत्रण किसी एक व्यक्ति के हाथों में केंद्रित होने दिया जा सकता है.”
