
Jamshedpur. Tata Motors के बोर्ड ने अपने पूर्व प्रबंध निदेशक और सीईओ गुंटर बुशचेक को 1 मई 2025 से 30 अप्रैल 2030 तक पांच साल की अवधि के लिए अतिरिक्त गैर-कार्यकारी स्वतंत्र निदेशक के रूप में नियुक्त करने को मंजूरी दे दी है. उनकी नियुक्ति ऐसे महत्वपूर्ण मोड़ पर हुई है, जब टाटा मोटर्स अपने रणनीतिक विभाजन की दिशा में आगे बढ़ रही है, जिसमें वह अपने वाणिज्यिक और यात्री वाहन कारोबार को अलग कर रही है, ताकि फोकस बढ़ाया जा सके, परिचालन क्षमता में सुधार लाया जा सके और शेयरधारकों के लिए अधिक मूल्य जुटाया जा सके. व्यवसाय रूपांतरण और संगठनात्मक पुनर्गठन में बुश्चेक के अनुभव से कंपनी को इस संरचनात्मक बदलाव में मूल्यवान अंतर्दृष्टि मिलने की उम्मीद है.
अनुभवी वैश्विक कार्यकारी अधिकारी बुशचेक ने डेमलर, एयरबस और टाटा मोटर्स में नेतृत्वकारी पदों पर कार्य किया है, जहां उन्होंने व्यवसाय परिवर्तन, आपूर्ति श्रृंखला अनुकूलन और औद्योगिक परिचालन पर ध्यान केंद्रित किया है.
2016 से 2021 तक टाटा मोटर्स के एमडी और सीईओ रहे
वर्तमान में, वह क्यूबोनिक जीएमबीएच के सीईओ हैं, जो टिकाऊ इलेक्ट्रिक एलसीवी समाधान प्रदान करता है, और चीज़केक एनर्जी लिमिटेड, यूके में गैर-कार्यकारी निदेशक के रूप में कार्य करते हैं. 2016 से 2021 तक टाटा मोटर्स के एमडी और सीईओ के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान, गुंटर बुशचेक ने परिचालन दक्षता और वित्तीय अनुशासन को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. उन्होंने टर्नअराउंड 2.0 का नेतृत्व किया, जो लागत में कमी, आपूर्ति श्रृंखला अनुकूलन और उत्पाद पोर्टफोलियो युक्तिकरण के उद्देश्य से एक पुनर्गठन पहल थी, जिसने कंपनी के प्रदर्शन को स्थिर करने में मदद की. उनके नेतृत्व में, टाटा मोटर्स ने अपने यात्री वाहन खंड को मजबूत किया, अपने बाजार हिस्से का विस्तार किया और नेक्सन, हैरियर, अल्ट्रोज़ और सफारी जैसे प्रमुख मॉडल पेश किए. उनके कार्यकाल में कंपनी ने इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की दिशा में शुरुआती कदम उठाए, जिसने भारत के ईवी बाजार में अपने मौजूदा नेतृत्व की नींव रखी.
इसलिए की गयी नियुक्ति
चूंकि टाटा मोटर्स अपने व्यवसाय पुनर्गठन और दीर्घकालिक विकास रणनीति के साथ आगे बढ़ रही है, इसलिए बोर्ड में बुशचेक की वापसी से इस परिवर्तनकारी चरण के दौरान रणनीतिक निर्णय लेने और परिचालन निष्पादन में वृद्धि होने की उम्मीद है।
