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Tata Steel: स्टील कंपनियों के लिए वैश्विक बाजार में चीन बड़ी चुनौती, इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार से ही मिलेगी गति, नववर्ष के मौके पर बोले MD नरेंद्रन

Jamshedpur. नववर्ष के मौके पर टाटा स्टील के प्रबंध निदेशक टीवी. नरेंद्रन ने कहा कि कंपनी कार्बन उत्सर्जन नियंत्रण से जुड़े नए सरकारी नियमों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के उपयोग को लेकर पूरी तरह तैयार है। उन्होंने साफ कहा कि वैश्विक बाजार में टाटा स्टील की सीधी प्रतिस्पर्धा चीन से है, लेकिन गुणवत्ता, तकनीक और लगातार हो रहे विकास के बल पर कंपनी अपनी मजबूत स्थिति बनाए रखेगी। गुरुवार को आयोजित नववर्ष कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि भारत सरकार द्वारा कार्बन उत्सर्जन को सीमित करने के लिए जारी किए गए नोटिफिकेशन उद्योग के भविष्य के लिए सकारात्मक कदम हैं। यूरोप में ऐसे नियम पहले से लागू हैं और अब भारत में इनके लागू होने से पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ उद्योग को नई दिशा मिलेगी।

टीवी नरेंद्रन ने भारतीय और वैश्विक इस्पात उद्योग की मौजूदा स्थिति पर कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था लगभग सात प्रतिशत की जीडीपी दर से आगे बढ़ रही है, जिसके चलते देश में हर साल स्टील की खपत में 10 से 15 प्रतिशत तक की वृद्धि हो रही है। टीवी नरेंद्रन ने कहा कि भारत की सभी स्टील कंपनियां मिलकर लगभग 150 मिलियन टन स्टील का उत्पादन करती हैं, जबकि अकेला चीन करीब 110 मिलियन टन स्टील का निर्यात करता है। उन्होंने बताया कि चीन से आयातित स्टील का भारत के घरेलू बाजार पर फिलहाल सीमित असर पड़ रहा है, लेकिन वैश्विक स्तर पर इसका असर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।

 विशेष रूप से मध्य एशिया और यूरोप के बाजारों में चीनी स्टील के कारण प्रतिस्पर्धा काफी बढ़ गई है। उन्होंने बताया कि बीते पांच वर्षों में स्टील की कीमतें निचले स्तर पर बनी हुई हैं। ऐसे में भारतीय स्टील कंपनियां चाहे जितनी भी प्रतिस्पर्धी बन जाएं, वे पांच प्रतिशत से अधिक मुनाफा अर्जित नहीं कर पा रही हैं। जिस दर पर चीन स्टील का निर्यात कर रहा है, उससे यह स्पष्ट होता है कि वहां की कंपनियां भी अधिक लाभ में नहीं हैं, लेकिन उन्हें सरकारी स्तर पर समर्थन प्राप्त है, जिससे वे वैश्विक बाजार में टिके हुए हैं।

इंफ्रास्ट्रक्चर विकास की तुलना करते हुए टीवी नरेंद्रन ने कहा कि चीन में पहले सड़क, रेल और अन्य बुनियादी ढांचे का विकास किया जाता है, उसके बाद उद्योग स्थापित होते हैं, जबकि भारत में स्थिति इसके उलट है। यहां पहले उद्योग लगते हैं और बाद में आधारभूत सुविधाओं का विकास होता है।

 इसी वजह से यूरोप की तुलना में भारत में मुंबई तक एक टन माल पहुंचाने में करीब 70 डॉलर तक का खर्च आता है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की दिशा में लगातार बेहतर कार्य कर रही है।

उन्होंने आयातित स्टील पर दो वर्षों के लिए सेफगार्ड ड्यूटी लगाए जाने को भारतीय स्टील उद्योग के लिए राहत भरा कदम बताया। साथ ही उन्होंने कहा कि यूरोप में कार्बन उत्सर्जन पर टैक्स लगाया जाता है, जबकि भारत में भी इस दिशा में नीतियां बनाई गई हैं, लेकिन उन्हें पूरी तरह प्रभावी होने में अभी समय लगेगा।

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