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देश का पहला HYPERLOOP तैयार, IIT मद्रास और Railway ने बनाया, अब टाटा-रांची के बीच सफर हो सकेगा साकार, 2017 में रघुवर दास ने रखी थी नींव, जानें क्या है प्लान

New Delhi. भारत में पहला Hyperloop विकसित किया जा चुका है. IIT मद्रास और Railway ने इसे बनाया है. इससे 350 किलोमीटर की दूरी मात्र 30 मिनट में तय की जा सकेगी. भारत का पहला हाइपरलूप 422 मीटर लंबा है. इसकी जानकारी रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने दी. X पर हाइपरलूप प्रोजेक्ट के बारे में जानकारी देते हुए रेल मंत्री ने लिखा, IIT मद्रास में हाइपरलूप प्रोजेक्ट सरकार-एकेडमिक सहयोग भविष्य के परिवहन में इनोवेशन को बढ़ावा दे रहा है. रेल मंत्रालय के आर्थिक सहयोग से चल रहे इस प्रोजेक्ट का निर्माण IIT मद्रास परिसर में किया गया है. इसे लेकर अश्विनी वैष्णव ने कहा,422 मीटर का पहला पॉड टेक्नोलॉजी के विकास में एक लंबा रास्ता तय करेगा.

मुझे लगता है कि अब समय आ गया है जब एक-एक मिलियन डॉलर के पहले दो अनुदानों के बाद, एक मिलियन डॉलर का तीसरा अनुदान आईआईटी मद्रास को हाइपरलूप परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए दिया जाएगा. इधर, टाटा से रांची के बीच हाई-स्पीड यात्रा का सपना जल्द ही हकीकत बन सकता है. भारतीय रेलवे के सहयोग से आइआइटी मद्रास द्वारा किये गये सफल हाइपरलूप परीक्षण के बाद इस प्रोजेक्ट की संभावनाएं और मजबूत हो गयी है. टाटा स्टील भी इस महत्वाकांक्षी परियोजना में सक्रिय रूप से शामिल है.

पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास का था प्रस्ताव
टाटा से रांची के बीच हाइपरलूप परियोजना की नींव 2017 में रखी गयी थी, जब तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास ने इस हाई-स्पीड ट्रांसपोर्ट सिस्टम की घोषणा की थी. उनका लक्ष्य 2019 तक इस प्रोजेक्ट को पूरा करने का था, लेकिन यह संभव नहीं हो पाया. उन्होंने बेलारूस की एक कंपनी से हाईस्पीड ट्रेन टेक्नोलॉजी पर चर्चा करने की बात कही थी. हालांकि, सरकार बदलने के बाद इस योजना पर ज्यादा काम नहीं हो पाया, लेकिन अब रेलवे मंत्रालय और टाटा स्टील की सक्रिय भागीदारी से इस परियोजना के फिर से साकार होने की उम्मीद बढ़ गयी है.
हाइपरलूप के फायदे क्या हैं?
– हाइपरलूप से हम 1000 किलोमीटर प्रति घंटे से भी ज्यादा की स्पीड से ट्रैवल कर सकते हैं. माने, बुलेट ट्रेन की स्पीड से भी 2-3 गुना ज्यादा तेज.
– हाइपरलूप बिजली पैदा करने के लिए सोलर पैनल का इस्तेमाल करता है. इसमें आवाज भी नहीं होती है. माने पॉल्यूशन नाम की कोई चीज नहीं.
– हाइपरलूप को ऑपरेट करना काफी सस्ता है. इसकी कैपिटल कॉस्ट भी हाई-स्पीड रेल से कम होती है. लगभग 60 प्रतिशत कम. जिससे किराया भी कम लगेगा.

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