
Ranchi. झारखंड हाइकोर्ट ने सेवा नियमितीकरण के मामले में एकल पीठ के आदेश को चुनौती देनेवाली अपील याचिका पर सुनवाई की. चीफ जस्टिस एमएस रामचंद्र राव व जस्टिस दीपक रोशन की खंडपीठ ने सभी पक्षों को सुनने के बाद अपील याचिका को आंशिक रूप से स्वीकार कर लिया. खंडपीठ ने कहा कि अपील आंशिक रूप से स्वीकार की जाती है. साथ ही एकल पीठ के निर्णय को रद्द किया जाता है.
खंडपीठ ने कहा कि प्रतिवादियों को निर्देश दिया जाता है कि वे अपीलकर्ता (प्रार्थी) की सेवाओं को क्लर्क के रूप में 22 जुलाई 2022 को अनुबंध-11 के अनुसार नियमित किये गये व्यक्तियों के बराबर इस आदेश की प्रति प्राप्त होने की तिथि से तीन माह के भीतर नियमित करेंगे, क्योंकि अपीलकर्ता ने निस्संदेह पैरा-नाै में संदर्भित नियमों (झारखंड सरकार के अधीनस्थ विनियमित रूप से नियोजित व कर्मचारी की सेवा विनियमन नियमावली-2015 में इस सीमा तक संशोधन किया गया कि नियमितीकरण के लिए निरंतर सेवा की गणना की कट ऑफ तिथि 10 अप्रैल 2006 से बदल कर 20 जून 2019 कर दी गयी है) के अनुसार 20 जून 2019 को 10 साल की सेवा पूरी कर ली है.
खंडपीठ ने कहा कि हम यह भी मानते हैं कि अपीलकर्ता रिट याचिका दायर करने से पहले तीन साल की अवधि के लिए लेखा लिपिक के पद पर काम करनेवाले नियमित कर्मचारियों को दिये जानेवाले पारिश्रमिक/लाभ के बराबर हकदार हैं.
