


Ranchi. झारखंड की विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने मंगलवार को पुलिसकर्मियों के वेतन के शीघ्र भुगतान की मांग की, जिसे कई जिलों में सरकारी कोष में कथित अनियमितताओं के सामने आने के बाद रोक दिया गया था। पुलिस संघ ने दावा किया कि अनियमितताओं की जांच शुरू होने के बाद मार्च से 70,000 से अधिक कर्मियों का वेतन रोक दिया गया है। इस महीने की शुरुआत में हजारीबाग, बोकारो और रांची के कोषागारों से कई करोड़ रुपये की धोखाधड़ी से निकासी का पता चला और कई पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार किया गया। झारखंड विधानसभा में विपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी ने दावा किया कि सरकारी खजाने में घोटाला कुछ बेईमान व्यक्तियों द्वारा किया गया था, जबकि ईमानदार पुलिसकर्मी इसके परिणाम भुगत रहे हैं।
मरांडी ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, जवाब दीजिए: अगर पुलिसकर्मियों को वेतन नहीं मिलेगा तो वे अपने परिवारों का भरण-पोषण कैसे करेंगे? सड़कों पर दोपहिया वाहन चालकों से जबरन वसूली करके? लोगों को फर्जी मामलों और मुकदमों में फंसाकर? या अपराधियों के साथ मिलीभगत करके? पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि अंततः इस समस्या का खामियाजा आम जनता को ही भुगतना पड़ेगा। उन्होंने कहा, इसलिए, पुलिसकर्मियों को समय पर वेतन का भुगतान सुनिश्चित करें।”
झारखंड पुलिस एसोसिएशन के अध्यक्ष राहुल कुमार मुर्मू ने बताया, ‘‘वेतन निधि से अनधिकृत निकासी की जांच शुरू होने के बाद मार्च से लगभग 70,000 से 80,000 पुलिसकर्मियों का वेतन रोक दिया गया है। उन्होंने कहा कि एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से पुलिस कर्मियों के वेतन रोके जाने के मुद्दे का संज्ञान लेने का अनुरोध किया है और उनसे कथित अनियमितताओं की उच्च स्तरीय जांच कराने का आग्रह किया है। राहुल कुमार ने दावा किया कि निचले स्तर के एक या दो पुलिस कर्मियों की गिरफ्तारी से कथित अनियमितताओं का पर्दाफाश नहीं हो सकता।
उन्होंने कहा, घोटाला स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि डेटा में हेरफेर करके की गई धनराशि की निकासी उच्च स्तरीय अधिकारियों की मिलीभगत के बिना संभव नहीं थी। इस सबके पीछे एक गिरोह काम कर रहा है।



