


Purulia. जम्मू कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले में मारे गए आसूचना ब्यूरो (आईबी) अधिकारी मनीष रंजन का शव जैसे ही पुरुलिया जिले में स्थित उनके घर पहुंचा तो उनके पिता एम.के. मिश्रा असहनीय पीड़ा से बिलख उठे. एम.के. मिश्रा पश्चिम बंगाल के झालदा में सेवानिवृत्त प्राधानाध्यापक है और बृहस्पतिवार को उनके 33 वर्षीय बेटे का पार्थिव शरीर उनके घर पहुंचा.
‘‘मैं बोलना नहीं चाहता… कृपया मुझे अकेला छोड़ दीजिए यही एकमात्र शब्द थे जो आईबी अधिकारी मनीष रंजन के पिता रुंधे गले से कह सके. रंजन हैदराबाद में आईबी के ‘सेक्शन ऑफिसर’ के पद पर तैनात थे और पहलगाम में मंगलवार को हुए आतंकवादी हमले में उनके सहित 26 लोग मारे गए. उनके पिता ने कहा, ‘‘रंजन मुस्कुराते हुए कश्मीर के लिए रवाना हुआ था. वह हर दिन फोन और ‘व्हाट्सएप’ पर हमसे हमारा हालचाल पूछता था. उस दिन भी हमने उससे फोन पर बात की थी.
रंजन के एक मित्र ने बताया कि इस छुट्टी से लौटने के बाद उसने अपने माता-पिता को वैष्णो देवी मंदिर ले जाने की योजना बनाई थी. रंजन का पार्थिव शरीर लेने के लिए बृहस्पतिवार को रांची हवाई अड्डे पर मौजूद संजीव कुमार गुप्ता ने कहा कि वह एक मेधावी छात्र था. रंजन के पार्थिव शरीर को उनके पैतृक स्थान ले जाने के लिए रांची हवाई अड्डे पर आए उनके एक अन्य मित्र आदित्य शर्मा ने कहा, ‘हमने कभी नहीं सोचा था कि ऐसी घटना घटेगी. लोग कहते हैं कि आतंकवादियों का कोई धर्म नहीं होता, लेकिन निर्दोष लोगों को उनके धर्म के कारण बेरहमी से मार दिया गया. रंजन और 25 अन्य मृतकों के शोक में झालदा कस्बे में दुकानें बंद रहीं.
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की झारखंड इकाई के अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी समेत अन्य नेताओं और प्रशासनिक अधिकारियों ने हवाई अड्डे पर रंजन को श्रद्धांजलि दी.



