


New Delhi. सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को उस याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया, जिसमें केंद्र को आईआरसीटीसी तत्काल बुकिंग प्रणाली की तकनीकी खामियों की पहचान कर इन्हें सुधारने के लिए गहन ऑडिट कराने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया था. तत्काल टिकट रेल यात्रा से एक दिन पहले बुक किये जा सकते हैं और इस श्रेणी के अंतर्गत सीमित संख्या में सीट उपलब्ध होती हैं. प्रधान न्यायाधीश संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति संजय कुमार की पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता अपनी शिकायत को लेकर संबंधित उच्च न्यायालय का रुख कर सकते हैं.
पीठ ने याचिकाकर्ता से कहा कि उच्च न्यायालय जाएं. आपने एक मुद्दा उठाया है. हमारे पास एक और रिट याचिका थी, जिसमें कहा गया था कि तत्काल सेवा नहीं होनी चाहिए. अब आप कह रहे हैं कि तत्काल टिकटों की बुकिंग से जुड़ी वेबसाइट को लेकर ही कुछ समस्या है. कृपया उच्च न्यायालय जाएं. पीठ ने कहा कि वह याचिका के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं कर रही है. याचिका में संबंधित अधिकारियों को भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम (आईआरसीटीसी) की तत्काल बुकिंग प्रणाली का गहन ऑडिट कराने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया था, ताकि ‘तकनीकी खामियों’ की पहचान कर इन्हें दूर किया जा सके.
याचिका में कठोर साइबर सुरक्षा उपाय लागू करने का निर्देश देने का भी अनुरोध किया किया गया था, ताकि अनधिकृत एजेंट और दलालों को स्वचालित बॉट और अवैध सॉफ्टवेयर प्रोग्राम के माध्यम से तत्काल बुकिंग प्रणाली में कथित रूप से हेराफेरी करने से रोका जा सके. याचिका में कहा गया था कि अधिकारियों को यात्रियों के उत्पीड़न को रोकने के लिए उठाए गए कदमों पर एक अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया जाना चाहिए, ताकि तत्काल टिकट बुकिंग प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके और तय समय सीमा के भीतर यह रिपोर्ट प्रस्तुत की जा सके.



