


Ranchi : डुमरी प्रखंड के बलथरिया पंचायत सेवक सुखलाल महतो ने रविवार को रांची के रिम्स अस्पताल में दम तोड़ दिया. बता दें कि शुक्रवार को उन्होंने डुमरी बीडीओ, बलथरिया पंचायत के मुखिया पति, पीएमएवाई बीसी और रोजगार सेवक पर मानसिक उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए प्रखंड कार्यालय परिसर में कीटनाशक पीलिया था. जिसके बाद उनकी हालत गंभीर होने पर पहले उन्हें डुमरी रेफरल अस्पताल, फिर पीएमसीएच और अंत में रिम्स रेफर किया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई. डुमरी के एसडीपीओ सुमित कुमार ने उनकी मौत की पुष्टि की है.
डुमरी विधायक जयराम महतो ने ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडे सिंह को पत्र लिखकर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की. वहीं गिरिडीह सांसद चंद्र प्रकाश चौधरी ने भी सुखलाल के परिजनों से मुलाकात की. विधि व्यवस्था बनाए रखने के लिए डुमरी एसडीओ ने सात स्थानों पर दंडाधिकारी और पुलिस तैनात किए हैं. एसडीपीओ सुमित कुमार ने कहा, “प्रशासन और पुलिस मामले की जांच कर रही है.” सुखलाल की मौत से इलाके में शोक है और लोग दोषियों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं.
सुखलाल ने मरने से पहले डुमरी विधायक जयराम महतो को पत्र लिखकर आरोपियों पर कार्रवाई की मांग की थी. मामले को गंभीरता से लेते हुए सरकार ने जांच के आदेश दिए हैं. गिरिडीह डीसी रामनिवास यादव ने अपर समाहर्ता विजय सिंह बिरुआ, सरिया बगोदर एसडीएम संतोष कुमार गुप्ता, मुख्यालय डीएसपी नीरज कुमार सिंह और डॉ. रवि महर्षि की कमेटी बनाई, जिसने डुमरी प्रखंड कार्यालय में बीडीओ और कर्मियों से पूछताछ शुरू की है.
झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जेएलकेएम) के सुप्रीमो और डुमरी विधायक जयराम महतो ने पंचायत सेवक सुखलाल महतो की मौत पर गंभीर सवाल उठाए हैं. डुमरी प्रखंड के बलथरिया गांव के पंचायत सेवक सुखलाल महतो ने कथित रूप से भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाई थी, जिसके बाद उनकी रिम्स अस्पताल में इलाज के दौरान मृत्यु हो गई. विधायक जयराम महतो ने इसे बेहद दुखद और शर्मनाक घटना बताया और कहा, “भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने वाला एक और सपूत मृत्यु से जंग हार गया.”
उन्होंने मांग की कि जिन लोगों ने सुखलाल महतो की आवाज दबाने की कोशिश की, उनके खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज हो और दोषियों की गिरफ्तारी के साथ-साथ सरकारी नौकरी से बर्खास्तगी की कार्रवाई की जाए. महतो ने राज्य सरकार से मांग की कि सुखलाल महतो के परिजनों को सरकारी सेवक की सभी सुविधाएं दी जाएं और साथ ही 50 लाख रुपये का मुआवजा भी दिया जाए.



