


Jamshedpur. लोकसभा में बेहतर काम करने पर 17 सांसदों को संसद रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया गया है. इन सांसदों ने लोकसभा में अपना अमूल्य योगदान दिया है. इसके अलावा चार सांसदों को विशेष जूरी पुरस्कार दिया. जमशेदपुर के सांसद विद्युत बरण महतो को चौथी बार प्रतिष्ठित संसद रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया गया. नई दिल्ली के केजी मार्ग स्थित न्यू महाराष्ट्र सदन में आयोजित सम्मान समारोह में केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने उन्हें शॉल ओढ़ाकर और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया. संसद रत्न पुरस्कार चयन समिति ने वर्ष 2024 के लिए चयनित सांसदों की घोषणा हाल ही में की थी, जिसमें नागरिक समाज और वरिष्ठ सांसदों के समूह द्वारा श्री महतो का चयन किया गया. सम्मान प्राप्ति के उपरांत सांसद महतो ने इसे जमशेदपुर लोकसभा की जनता और कार्यकर्ताओं की प्रेरणा का परिणाम बताया. उन्होंने कहा, यह पुरस्कार मुझे और अधिक जिम्मेदार बनाता है और लोकसभा में जनहित के मुद्दे उठाने की प्रेरणा देता है.
भाजपा सांसद रवि किशन भी हुए सम्मानित
संसद रत्न पुरस्कार पाने वालों में गोरखपुर से भाजपा सांसद रवि किशन, एनसीपी शरद की सुप्रिया सुले, भाजपा सांसद निशिकांत दुबे और शिवसेना यूबीटी के सांसद अरविंद सावंत समेत 17 सांसद शामिल हैं. वहीं तीन कार्यकालों में संसदीय लोकतंत्र में निरंतर योगदान देने वाले चार सांसदों को चार विशेष जूरी पुरस्कार दिए गए. इसमें ओडिशा से भाजपा सांसद भर्तृहरि महताब, रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी, केरल के सांसद एनके प्रेमचंद्रन, एनसीपी शरद की सांसद सुप्रिया सुले, शिवसेना सांसद श्रीरंग अप्पा बार्ने शामिल हैं. संसद रत्न पुरस्कार पाने वाले सांसदों में स्मिता उदय वाघ (भाजपा), नरेश म्हस्के (शिवसेना), वर्षा गायकवाड़ (कांग्रेस), मेधा कुलकर्णी (भाजपा), प्रवीण पटेल (भाजपा) और दिलीप सैकिया (भाजपा) शामिल हैं.
संसदीय समिति को भी मिला सम्मान
संसदीय समिति श्रेणी में भर्तृहरि महताब की अध्यक्षता वाली वित्त संबंधी स्थायी समिति और डॉ. चरणजीत सिंह चन्नी (कांग्रेस) की अध्यक्षता वाली कृषि संबंधी स्थायी समिति को उनकी रिपोर्टों की गुणवत्ता तथा विधायी निगरानी में योगदान के लिए सम्मानित किया गया.
जानेंं क्या है संसद रत्न पुरस्कार?
संसद रत्न पुरस्कार की शुरुआत 2010 में हुई थी और यह पुरस्कार उन सांसदों को दिए जाते हैं जो पारदर्शिता, जवाबदेही और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूती देने के लिए संसद में सक्रिय रहते हैं. इसका उद्देश्य सांसदों को प्रोत्साहित करना और जनता के बीच संसदीय कार्यवाही को लोकप्रिय बनाना है. ये पुरस्कार संसद में सक्रियता, बहस में भागीदारी, प्रश्न पूछने और विधायी कामकाज में योगदान के आधार पर दिए जाते हैं. यह पुरस्कार प्राइम प्वाइंट फाउंडेशन की तरफ से शुरू किया गया है। इस वर्ष के विजेताओं का चयन जूरी कमेटी ने किया, जिसकी अध्यक्षता हंसराज अहीर, (राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष) ने की.



