


New Delhi. विभिन्न राज्यों के मंत्रियों के एक समूह ने बृहस्पतिवार को केंद्र के जीएसटी दरों में कटौती के माध्यम से अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था में व्यापक सुधारों को सैद्धांतिक रूप से मंजूरी दे दी, लेकिन कुछ विपक्षी दल शासित राज्य यह जानना चाहते हैं कि इस कदम से होने वाले राजस्व नुकसान और उसकी भरपाई कैसे की जाएगी. बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता वाले मंत्रिसमूह ने माल एवं सेवा कर (जीएसटी) के तहत स्लैब की संख्या चार (5, 12, 18 और 28 प्रतिशत) से घटाकर दो (5 और 18 प्रतिशत) करने के केंद्र के प्रस्ताव पर चर्चा की. केंद्र ने पांच-सात चुनिंदा वस्तुओं पर 40 प्रतिशत की दर से जीएसटी लगाने का भी प्रस्ताव रखा है.
मंत्रिसमूह आम आदमी के लिए फायदेमंद होने पर दर और स्लैब में बदलाव के पक्ष में है, लेकिन कुछ सदस्य चाहते थे कि महंगी कारों जैसी विलासिता वाली वस्तुओं पर विशेष 40 प्रतिशत कर के अलावा एक अतिरिक्त कर लगाया जाए. छह सदस्यीय मंत्रिसमूह की सिफारिशें उच्चस्तरीय जीएसटी परिषद को भेजी जाएंगी, जो सुधारों पर अंतिम निर्णय लेगी. मंत्रिसमूह में भाजपा शासित राज्यों बिहार, उत्तर प्रदेश और राजस्थान से तीन-तीन सदस्य और विपक्षी शासित राज्यों कर्नाटक (कांग्रेस), केरल (वाम मोर्चा) और पश्चिम बंगाल (तृणमूल कांग्रेस) से समान संख्या में सदस्य शामिल हैं.



