


Ranchi : रांची नगर निगम ने शुक्रवार को शहर के होल्डिंग टैक्स बकायेदारों की सूची जारी कर बड़ा कदम उठाया है. निगम की ओर से जारी इस सूची में 500 बड़े बकायेदारों के नाम शामिल हैं, जो लंबे समय से टैक्स अदा करने से बचते आ रहे हैं. छोटे टैक्सपेयर्स जहां समय पर टैक्स का भुगतान कर रहे हैं, वहीं बड़े बकायेदार वर्षों से नगर निगम की आंखों में धूल झोंककर करोड़ों रुपये का बकाया दबाए बैठे हैं.
इस सूची में सबसे छोटे बकायेदार एचबी रोड आनंद कॉम्प्लेक्स निवासी करबी दत्ता हैं, जिनका कुल बकाया 86,426.36 रुपये है. वहीं, सबसे बड़ा टैक्स बकायेदार बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (BIT), सरकुलर रोड है, जिस पर कुल 16,54,297.88 रुपये का बकाया है. बाकी 498 बकायेदारों की बकाया राशि 86 हजार से लेकर 16 लाख रुपये के बीच है.
निगम के आंकड़ों पर गौर करें तो साफ है कि शहर के बड़े टैक्स डिफॉल्टर निगम के राजस्व पर गाज बनकर लटक रहे हैं. छोटे-छोटे दुकानदार और साधारण नागरिक हर साल हजार-दो हजार रुपये का टैक्स नियमित रूप से भरते हैं, लेकिन करोड़ों का कारोबार करने वाले संस्थान और बड़े भवन मालिक टैक्स भुगतान से बचते हुए निगम को करोड़ों की चपत लगा रहे हैं.
नगर निगम के एक अधिकारी ने बताया कि ईमानदार टैक्सपेयर्स का हक मारा जा रहा है, क्योंकि निगम को मिलने वाले राजस्व से ही शहर के विकास कार्य, सड़क-नाली की मरम्मत, साफ-सफाई और बुनियादी सुविधाओं पर खर्च किया जाता है. जब बड़े बकायेदार टैक्स नहीं देते तो इसका सीधा असर आम जनता की सुविधाओं पर पड़ता है.
निगम की ओर से यह भी स्पष्ट कर दिया गया है कि फिलहाल बकायेदारों को अंतिम मौका दिया जा रहा है. उन्हें टैक्स भुगतान करने के लिए नोटिस जारी किया जाएगा. यदि इसके बावजूद भी उन्होंने राशि जमा नहीं की, तो नगर निगम कठोर कार्रवाई से पीछे नहीं हटेगा. इसमें बकायेदारों की संपत्ति को सील करना, राजस्व वसूली टीम की कार्रवाई और कानूनी प्रक्रिया शामिल हो सकती है.
शहर के नागरिकों का कहना है कि यह कदम काफी सराहनीय है. छोटे टैक्सपेयर्स का मानना है कि जब वे अपनी आमदनी का हिस्सा काटकर टैक्स जमा कर सकते हैं तो बड़े संस्थान और प्रतिष्ठान किस आधार पर टैक्स बकाया रखते हैं. निगम को चाहिए कि वह जल्द से जल्द इन बकायेदारों पर कार्रवाई करे ताकि बाकी लोग भी सबक लें.
रांची नगर निगम अब यह संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि टैक्स चोरी किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं की जाएगी. निगम ने सूची सार्वजनिक कर दी है, ताकि शहरवासी भी जान सकें कि कौन लोग टैक्स चुकाने से बचते आ रहे हैं. उम्मीद जताई जा रही है कि इस कदम से न केवल टैक्स वसूली में तेजी आएगी बल्कि टैक्स चोरी करने वालों पर भी लगाम लगेगी.



