


Jamshedpur. शिवालिक आ गया है. पश्चिम एशिया में संघर्ष के केंद्र होर्मुज स्ट्रेट से गुजरकर यह भारतीय जहाज लौटा है । अपने साथ देशवासियों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है। इस पर 46,000 टन एलपीजी लोड है। मंगलवार को यह मुंद्रा पोर्ट के एलपीजी टर्मिनल पर पहुंचा तो पूरे देश में खुशी की लहर दौड़ गई। जमशेदपुर के सेकंड इंजीनियर अंश त्रिपाठी समेत 27 क्रू मेंबर ने साहस और जिम्मेदारी का परिचय देते हुए एलपीजी से लदे जहाज को सुरक्षित भारत लाने में सफलता हासिल की है। शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के विशालकाय जहाज ‘शिवालिक’ पर तैनात अंश ने 13 मार्च को दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित पार किया था। इसे होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित गुजरने की मंजूरी मिली थी. जब सीना तानकर शिवालिक वहां से गुजरा था तब पूरी दुनिया ने यह नजारा देखा था।
यह भारत की कूटनीति की बड़ी जीत है. एक और जहाज ‘नंदा देवी’ के मंगलवार को भारत पहुंचने की उम्मीद है. वह भी एलपीजी के साथ भारत पहुंचेगा. बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने सोमवार को कहा कि संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के फुजैराह बंदरगाह पर हमले के बावजूद सुरक्षित रवाना हुआ।
भारतीय ध्वज वाला कच्चा तेल टैंकर मंगलवार को भारत पहुंचेगा। उन्होंने यह भी कहा कि भारत क्षेत्र में फंसे अन्य भारतीय ध्वज वाले जहाजों को सुरक्षित निकलने का रास्ता साफ करने के लिए काम कर रहा है। सिन्हा ने कहा कि संयुक्त अरब अमीरात से लगभग 80,800 टन मुरबान कच्चा तेल ले जा रहा जहाज ‘जग लाडकी’ और उस पर सवार सभी 22 भारतीय नाविक सुरक्षित हैं। जग लाडकी उन 28 भारतीय जहाजों में से चौथा जहाज है जो पिछले दो हफ्तों से युद्धग्रस्त होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे हुए हैं। जहाज पर करीब 46 हजार मीट्रिक टन एलपीजी लदा है, जो इंडियन ऑयल के लिए खाड़ी देशों से लाया जा रहा है। अब यह जहाज गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह की ओर बढ़ रहा है। जहाज के कैप्टन सुखमीत सिंह के नेतृत्व में 27 सदस्यीय क्रू लगातार अपने कर्तव्य में जुटा हुआ है।

अंश त्रिपाठी सेकंड इंजीनियर के पद पर हैं तैनात
अंश त्रिपाठी जहाज पर सेकंड इंजीनियर के पद पर तैनात हैं। उनकी जिम्मेदारी जहाज के तकनीकी संचालन को सुचारू बनाए रखना थी। उन्होंने 26 नवंबर 2025 को ‘शिवालिक’ पर अपनी ड्यूटी ज्वॉइन की थी। उस समय किसी को अंदाजा नहीं था कि खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव के कारण यह यात्रा इतनी चुनौतीपूर्ण हो जाएगी।

जमशेदपुर के पारडीह में रहता है परिवार
13 मार्च को जहाज के सुरक्षित रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य पार करने की खबर मिलते ही जमशेदपुर के पारडीह स्थित आशियाना वुडलैंड में रहने वाले अंश के परिवार ने राहत की सांस ली। उनके पिता मिथिलेश कुमार त्रिपाठी, जो यूसीआइएल से सेवानिवृत्त उप-प्रबंधक हैं। उन्होंने बताया कि पिछले कई दिनों से पूरा परिवार चिंता में था। बेटे की सलामती के लिए भगवान से प्रार्थना कर रहा था। अंश की मां चंदा त्रिपाठी ने कहा कि बीता एक सप्ताह बेहद तनाव भरा रहा। हर पल अनहोनी का डर लगा रहता था, लेकिन अब बेटे के सुरक्षित लौटने की खबर से मन को सुकून मिला है।



