


जमशेदपुर/चक्रधरपुर में वन्यजीव संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए दक्षिण पूर्व रेलवे के चक्रधरपुर मंडल ने एक सराहनीय कदम उठाया है। हाथियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए फॉरेस्ट कॉरिडोर क्षेत्रों में ट्रेनों की गति को नियंत्रित किया जा रहा है। यह पहल मानव और वन्यजीवों के बीच संतुलन बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
ट्रेन संचालन पर पड़ा असर
रेलवे द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार 01 अप्रैल से 09 अप्रैल 2026 के बीच टाटा–झारसुगुड़ा और नुगाँव–राउरकेला सेक्शन में कुल 328 ट्रेनों की रफ्तार कम की गई। इसके चलते ट्रेनों के संचालन में लगभग 549.09 मिनट यानी 9 घंटे से अधिक का समय नुकसान दर्ज किया गया। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि यह देरी वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए जरूरी है।
हाथियों की आवाजाही बनी चुनौती
झारखंड और ओडिशा के सीमावर्ती वन क्षेत्रों में हाथियों की लगातार आवाजाही रहती है। कई बार ये हाथी रेलवे ट्रैक पार करते हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। बीते वर्षों में ट्रेन से टकराकर हाथियों की मौत की घटनाएं सामने आई हैं, जिसे रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है।
फॉरेस्ट कॉरिडोर में बढ़ाई गई सतर्कता
चक्रधरपुर मंडल द्वारा चिन्हित फॉरेस्ट कॉरिडोर में विशेष निगरानी रखी जा रही है। लोको पायलटों को पहले से अलर्ट किया जाता है और ट्रेनों की गति सीमित रखी जाती है ताकि किसी भी आपात स्थिति में समय रहते ट्रेन रोकी जा सके। इसके साथ ही ट्रैक के आसपास गश्त और निगरानी भी बढ़ा दी गई है।
सकारात्मक असर दिखने लगा
इस पहल का सकारात्मक प्रभाव भी देखने को मिल रहा है। जहां पहले हाथियों के साथ दुर्घटनाओं की खबरें आती थीं, अब उनमें कमी आई है। स्थानीय लोग और पर्यावरण प्रेमी भी इस कदम की सराहना कर रहे हैं और इसे सहअस्तित्व की दिशा में एक बेहतर प्रयास मान रहे हैं।
यात्रियों से सहयोग की अपील
हालांकि, इस स्पीड नियंत्रण का असर यात्रियों पर पड़ रहा है और ट्रेनों की देरी से यात्रा समय बढ़ रहा है। लेकिन रेलवे ने यात्रियों से अपील की है कि वे इस संवेदनशील मुद्दे को समझें और वन्यजीव संरक्षण में सहयोग करें।
भविष्य में तकनीक से मिलेगी मदद
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में ड्रोन निगरानी और सेंसर आधारित अलर्ट सिस्टम जैसी तकनीकों का उपयोग कर इस व्यवस्था को और बेहतर बनाया जा सकता है। इससे सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी और ट्रेनों की देरी भी कम की जा सकेगी।



