


सरायकेला-खरसावां, 02 जून 2026। पंचायत उपबंध (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) झारखंड नियमावली, 2025 के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर मंगलवार को समाहरणालय सभागार, सरायकेला में ग्लोबल पंचायत राउंड टेबल कॉन्क्लेव का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता उप विकास आयुक्त (डीडीसी) श्रीमती रीना हांसदा ने की। कॉन्क्लेव में विभिन्न विभागों के अधिकारियों, पंचायत प्रतिनिधियों, सिविल सोसाइटी संगठनों (CSO) के प्रतिनिधियों एवं अन्य हितधारकों ने भाग लिया।
पेसा कानून की समझ विकसित करने पर बल
कार्यक्रम के स्वागत संबोधन में प्रभारी जिला पंचायती राज पदाधिकारी गोपी उरांव ने कहा कि पेसा नियमावली, 2025 को लेकर पंचायत प्रतिनिधियों, सरकारी अधिकारियों एवं ग्रामीण समुदाय के बीच स्पष्ट समझ विकसित करना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि कार्यशाला का उद्देश्य पेसा कानून के विभिन्न प्रावधानों की जानकारी साझा करना और इसके सफल क्रियान्वयन के लिए सभी पक्षों के बीच समन्वय स्थापित करना है।
ग्रामसभा की भूमिका और अधिकारों पर चर्चा
कार्यशाला के दौरान राज्य स्तरीय प्रशिक्षक ने पेसा नियमावली, 2025 के विभिन्न प्रावधानों की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने ग्रामसभा की शक्तियों, अधिकारों, दायित्वों और भूमिका पर प्रकाश डालते हुए बताया कि अनुसूचित क्षेत्रों में स्थानीय स्वशासन को मजबूत बनाने में ग्रामसभा की केंद्रीय भूमिका है।
इसके अलावा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, स्थानीय विकास योजनाओं में जनभागीदारी सुनिश्चित करने और निर्णय प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने के उपायों पर भी चर्चा की गई।
भ्रांतियां दूर करने की आवश्यकता
अपने अध्यक्षीय संबोधन में डीडीसी रीना हांसदा ने कहा कि पेसा कानून को लेकर लोगों में उत्साह तो है, लेकिन जागरूकता की कमी और कई तरह की भ्रांतियां भी मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि नियमावली के सफल कार्यान्वयन के लिए सही और तथ्यात्मक जानकारी का व्यापक प्रचार-प्रसार आवश्यक है।
उन्होंने सभी विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों को पेसा नियमावली के प्रावधानों को गहराई से समझने और अपने-अपने कार्यक्षेत्र में इसका प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।
सामुदायिक सहभागिता पर दिया गया जोर
डीडीसी ने सिविल सोसाइटी संगठनों की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि ये संस्थाएं ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता बढ़ाने और लोगों को पेसा कानून से जोड़ने में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों एवं ग्रामीण समुदाय के बीच निरंतर जागरूकता अभियान चलाने की अपील की।
सुझाव और संवाद के साथ कार्यक्रम संपन्न
कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों से पेसा नियमावली, 2025 के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर सुझाव आमंत्रित किए गए। इस दौरान ग्रामसभा की भूमिका, अधिकारों और व्यवहारिक चुनौतियों से जुड़े कई प्रश्न उठाए गए, जिनका राज्य स्तरीय प्रशिक्षक द्वारा विस्तारपूर्वक समाधान किया गया। साथ ही सभी प्रतिभागियों को अपने क्षेत्रों में पेसा कानून के प्रति जागरूकता फैलाने और ग्रामसभा को सशक्त बनाने के लिए प्रेरित किया गया।




