


जमशेदपुर: भारत सरकार के मिड-कैरियर प्रशिक्षण कार्यक्रम (MCTP-II) के तहत भारतीय विदेश सेवा (IFS) के दो वरिष्ठ अधिकारियों ने शुक्रवार को सीएसआईआर-राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला (CSIR-NML), जमशेदपुर का भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने संस्थान में विकसित हो रही अत्याधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों, धातु एवं खनिज अनुसंधान और उद्योगोन्मुख नवाचारों की विस्तृत जानकारी प्राप्त की। अधिकारियों के साथ जिला खनन पदाधिकारी तथा जमशेदपुर एवं चाईबासा जिला उद्योग केंद्र के अधिकारी भी मौजूद रहे।
निदेशक के साथ हुई वैज्ञानिक उपलब्धियों पर विस्तृत चर्चा
प्रतिनिधिमंडल में सुशील प्रसाद, उप उच्चायुक्त, भारतीय उच्चायोग, नैरोबी (केन्या) और एम.डी. शाहिद आलम, काउंसलर, भारतीय उच्चायोग, लंदन (यूनाइटेड किंगडम) शामिल थे। दौरे के दौरान उन्होंने CSIR-NML के निदेशक डॉ. संदीप घोष चौधरी तथा विभिन्न विभागाध्यक्षों के साथ संवाद किया।
बैठक में अधिकारियों को संस्थान की अनुसंधान एवं विकास (R&D) गतिविधियों, प्रमुख वैज्ञानिक उपलब्धियों और खनिज, धातु एवं पदार्थ विज्ञान के क्षेत्र में किए जा रहे महत्वपूर्ण कार्यों की जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने बताया कि CSIR-NML देश में धातुकर्म अनुसंधान और औद्योगिक तकनीक विकास के प्रमुख केंद्रों में से एक है।
अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं का किया निरीक्षण
भ्रमण के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने संस्थान की कई अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं का दौरा किया। इनमें क्रीप परीक्षण प्रयोगशाला (Creep Testing Laboratory), हॉट डिप प्रोसेस सिम्युलेटर लैब, अर्बन ओर रीसाइक्लिंग सेंटर तथा मैग्नीशियम धातु उत्पादन एवं आसवन सुविधा प्रमुख रहीं।
वैज्ञानिकों ने अधिकारियों को इन प्रयोगशालाओं में विकसित की जा रही उन्नत प्रौद्योगिकियों, अनुसंधान परियोजनाओं और उद्योगों के लिए विकसित नवाचारों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। साथ ही यह भी बताया गया कि आधुनिक तकनीक के माध्यम से धातु उत्पादन, रीसाइक्लिंग और सतत औद्योगिक विकास को कैसे गति दी जा रही है।
वैज्ञानिक क्षमता और नवाचार की सराहना
भारतीय विदेश सेवा के अधिकारियों ने CSIR-NML की विश्वस्तरीय अनुसंधान सुविधाओं, वैज्ञानिक क्षमता और औद्योगिक नवाचार को बढ़ावा देने में संस्थान की भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के अनुसंधान संस्थान भारत की वैज्ञानिक क्षमता को वैश्विक स्तर पर मजबूत पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
अधिकारियों ने इस दौरे को ज्ञान और अनुभवों के आदान-प्रदान का प्रभावी माध्यम बताते हुए कहा कि ऐसे संवाद अनुसंधान, उद्योग और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को नई दिशा देने में सहायक सिद्ध होंगे। कार्यक्रम सौहार्दपूर्ण, संवादात्मक और परस्पर सीखने के वातावरण में संपन्न हुआ।


