



धनबाद: भारतीय रेलवे में यात्रियों की सुरक्षा और मानवीय संवेदनशीलता का एक सराहनीय उदाहरण धनबाद मंडल में देखने को मिला। गुरुवार को आसनसोल-धनबाद रेलखंड पर चल रही गाड़ी संख्या 13051 कालका एक्सप्रेस के जनरल कोच में टिकट जांच के दौरान 14 वर्षीय बालक रंगन घोष संदिग्ध और भयभीत अवस्था में मिला। टिकट चेकिंग स्टाफ के सदस्य राकेश कुमार की सतर्कता और त्वरित कार्रवाई के कारण बालक को सुरक्षित उसके परिजनों से मिलाया जा सका। इस घटना ने रेलवे कर्मचारियों की जिम्मेदारी, संवेदनशीलता और सजगता को एक बार फिर उजागर किया है।
चेकिंग के दौरान भयभीत अवस्था में मिला नाबालिग
धनबाद मंडल के टिकट चेकिंग स्टाफ द्वारा नियमित जांच अभियान के दौरान कालका एक्सप्रेस के जनरल कोच में एक किशोर अकेला और घबराया हुआ दिखाई दिया। पूछताछ करने पर उसने स्वीकार किया कि वह घर से भागकर ट्रेन में बैठा था। उसकी बातों में असमंजस और भय स्पष्ट दिखाई दे रहा था, जिसके बाद रेलवे कर्मचारी ने मामले को गंभीरता से लिया।
स्कूल आईडी कार्ड से मिला परिवार का सुराग
बालक के पास मौजूद स्कूल आईडी कार्ड की सहायता से उसके पिता मानव घोष का संपर्क नंबर प्राप्त किया गया। तत्काल फोन कर सूचना देने पर पिता ने बताया कि उनका पुत्र घर से लापता है और उसकी सुरक्षित देखरेख करने का अनुरोध किया। इसके बाद टिकट चेकिंग स्टाफ ने तुरंत धनबाद कमर्शियल कंट्रोल, आरपीएफ और जीआरपी को घटना की जानकारी दी।
धनबाद स्टेशन पर आरपीएफ-जीआरपी को सौंपा गया बालक
ट्रेन के धनबाद स्टेशन पहुंचने पर बालक को रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और सरकारी रेलवे पुलिस (GRP) के सुपुर्द किया गया। बाद में उसके पिता बंगाल पुलिस के साथ धनबाद पहुंचे। जीआरपी ने आवश्यक कानूनी और प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद बालक को सुरक्षित उसके पिता के हवाले कर दिया।
रेलवे प्रशासन की सतर्कता की सराहना
बालक के पिता और बंगाल पुलिस ने धनबाद मंडल के टिकट चेकिंग स्टाफ और रेलवे प्रशासन की सतर्कता, संवेदनशीलता और मानवीय दृष्टिकोण की प्रशंसा करते हुए आभार व्यक्त किया। धनबाद मंडल ने भी अपने कर्मचारियों की कर्तव्यनिष्ठा और उत्कृष्ट कार्यशैली की सराहना की है। यह घटना दर्शाती है कि रेलवे केवल परिवहन सेवा नहीं, बल्कि यात्रियों और बच्चों की सुरक्षा के प्रति भी गंभीर रूप से प्रतिबद्ध है।


