

जमशेदपुर, 21 सितंबर। हिंदी सप्ताह समारोह के अवसर पर सोमवार को सीएसआईआर-राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला (NML) के ऐतिहासिक प्रेक्षागृह में कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में शहर के कवियों और कवयित्रियों ने गीत, शृंगार, ओज, देशभक्ति और गजल के माध्यम से श्रोताओं को साहित्य और भावनाओं से जोड़ा।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए एनएमएल के निदेशक डॉ. संदीप घोष चौधुरी ने कहा कि कवि सम्मेलन केवल कवियों और श्रोताओं के बीच संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि सांस्कृतिक विरासत के उत्सव का अवसर भी है। उन्होंने कहा कि कविता मनुष्य की आत्मा की अभिव्यक्ति है और जब शब्द भावनाओं से जुड़ते हैं तो वे लोकजीवन के दर्पण बन जाते हैं।
कविता लोकजीवन की संवेदनाओं का माध्यम
डॉ. घोष चौधुरी ने कहा कि लोकमानस की पीड़ा, आशा, उल्लास और संवेदनाओं को व्यक्त करने में कविता की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। कविता लोगों को एक-दूसरे से जोड़ती है और यह एहसास कराती है कि दुख केवल व्यक्तिगत अनुभव नहीं, बल्कि साझा मानवीय संवेदना का हिस्सा भी हो सकता है।
प्रयोगशाला के प्रशासन नियंत्रक जयशंकर शरण ने कहा कि ओजस्वी कविताएं समाज को जागरूक करने के साथ अन्याय के खिलाफ खड़े होने की ऊर्जा देती हैं। उन्होंने कहा कि शृंगार और गीत जीवन की मधुरता को अभिव्यक्त करते हैं, जबकि व्यंग्य समाज की विसंगतियों को सामने लाने का प्रभावी माध्यम है।
उन्होंने कहा कि गजल और गीत मनुष्य की भावनाओं को गहराई से स्पर्श करते हुए शांति और चिंतन की ओर ले जाते हैं।
कवियों ने अलग-अलग रसों से श्रोताओं को जोड़ा
कवि सम्मेलन में दिवेन्दु त्रिपाठी ने गीतों और मंच संचालन के माध्यम से कार्यक्रम को जीवंत बनाए रखा। डॉ. संगीता नाथ ने ओज और शृंगार रस की रचनाएं प्रस्तुत कीं, जबकि मंजू शरण मंजुल ने गीत और शृंगार की कविताओं से श्रोताओं को भाव-विभोर किया।
बलविंदर सिंह ने देशभक्ति से जुड़ी ओजपूर्ण कविताएं प्रस्तुत कर श्रोताओं में राष्ट्रप्रेम की भावना जगाई। वहीं सुमन मिश्रा ने अपनी गजलों के माध्यम से संवेदनाओं की गहराई को स्वर दिया।
कविता झारखंड की सांस्कृतिक चेतना का हिस्सा : डॉ. पुरुषोत्तम कुमार
प्रयोगशाला के वरिष्ठ हिंदी अधिकारी चयन ग्रेड डॉ. पुरुषोत्तम कुमार ने कहा कि कवि सम्मेलन केवल साहित्यिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह झारखंड की सांस्कृतिक चेतना से जुड़ा उत्सव भी है। उन्होंने कहा कि कविता अपने विभिन्न रूपों के माध्यम से यह संदेश देती है कि वह केवल शब्दों का संयोजन नहीं, बल्कि जीवन की धड़कन है।
कार्यक्रम में प्रयोगशाला के अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे। संगीता घोष चौधुरी की भी कार्यक्रम में उपस्थिति रही। आयोजन के दौरान हिंदी भाषा, साहित्य और कविता के प्रति कर्मचारियों में उत्साह देखने को मिला।


