

New Delhi. जहां अंतरराष्ट्रीय बाजार अब भी मंदी और सुस्ती से जूझ रहे हैं, वहीं भारत में घरेलू मांग लगातार बढ़ रही है. मांग मजबूत बनी हुई है और पिछले छह से आठ सप्ताह में इस्पात की कीमतों में तेजी आने लगी है, जो उद्योग के लिए सकारात्मक है क्योंकि कोकिंग कोल की कीमतें भी 50 से 60 डॉलर प्रति टन बढ़ गई हैं. कंपनी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) एवं प्रबंध निदेशक टी वी नरेंद्रन ने यह जानकारी दी.
उन्होंने कहा कि टाटा स्टील पोर्ट टैलबोट संयंत्र में इलेक्ट्रिक आर्क फर्नेस (ईएएफ) परियोजना को समय से पूरा करने में आ रही अड़चनों को दूर करने के लिए ब्रिटेन सरकार से बातचीत करने की कोशिश कर रही है. उन्होंने स्पष्ट किया कि 1.25 अरब पाउंड के निवेश से स्थापित की जा रही 32 लाख टन क्षमता वाली इस परियोजना के निर्माण कार्य में टाटा स्टील की ओर से कोई देरी नहीं हुई है.
ऑल इंडिया मैनेजमेंट एसोसिएशन (एआईएमए) के 53वें राष्ट्रीय प्रबंधन सम्मेलन के मौके पर नरेंद्रन ने कहा, हम ब्रिटेन की सरकार से संपर्क में हैं ताकि इस बात पर चर्चा की जा सके कि क्या कदम उठाए जा सकते हैं. वह ब्रिटेन की परियोजना के लिए भविष्य की रूपरेखा पर पूछे गए एक सवाल का जवाब दे रहे थे. इसके लिए बिजली आपूर्ति हासिल करने में देरी का सामना करना पड़ रहा है.
नरेंद्रन ने अगस्त में कहा था कि टाटा स्टील ब्रिटेन को 2029 तक अपनी 32 लाख टन क्षमता वाली इलेक्ट्रिक आर्क फर्नेस के लिए बिजली आपूर्ति मिलने की उम्मीद है. ब्रिटेन सरकार के 50 करोड़ पाउंड के वित्तीय सहयोग से तैयार की जा रही इस परियोजना का उद्देश्य संयंत्र स्तर पर कार्बन डाई-ऑक्साइड (सीओ2) उत्सर्जन में 90 प्रतिशत तक की कटौती करना है, जो सालाना 50 लाख टन के बराबर है.
यह पूछने पर जाने पर कि क्या टाटा स्टील ने ब्रिटेन सरकार से नए सिरे से अतिरिक्त वित्तीय मदद मांगी है, नरेंद्रन ने इससे इनकार किए बिना कहा, ‘हम किस स्थिति में हैं, इस पर अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी, लेकिन चिंताओं से अवगत कराने के लिए उनके साथ बातचीत जारी है.’

