Jamshedpur. कोवाली थाना क्षेत्र के मझगांव में वर्ष 2018 में हुई मारपीट के मामले में जमशेदपुर के न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी धर्मेंद्र कुमार की अदालत ने सात आरोपियों को दोषी करार दिया है. अदालत ने छह आरोपियों को चेतावनी देकर रिहा कर दिया, जबकि पूर्व में दोषसिद्धि के कारण पोल्टू मंडल को छह माह के साधारण कारावास और कुल तीन हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है. फैसला 7 अक्टूबर 2026 को सुनाया गया. मामला 26 मार्च 2018 का है. सूचक संपारानी मंडल की शिकायत के अनुसार, गांव में धुलट पर्व के दौरान अबीर-गुलाल लगाने को लेकर विवाद हुआ था.

आरोप था कि विरोध करने पर उनके परिवार के सदस्यों प्रशांत मंडल और देवाशीष मंडल के साथ मारपीट की गई. सूचक ने गले से सोने की चेन छीनने का आरोप भी लगाया था. घटना को लेकर कोवाली थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई थी. मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने आठ गवाहों के बयान दर्ज कराये. अदालत ने गवाहों के बयानों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर पिंटू मंडल, अंबुज मंडल, राजित मंडल, पोल्टू मंडल, अनुपम मंडल, स्वदेश मंडल और तमाल मंडल को भारतीय दंड संहिता की धारा 323/341/34 के तहत दोषी पाया. अदालत ने धारा 448, 504 और 506 के आरोपों को पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में साबित नहीं माना और इन धाराओं से आरोपियों को बरी कर दिया. सोने की चेन छीनने के आरोप में भी दोषसिद्धि नहीं हुई, क्योंकि इस अपराध के तहत आरोप तय कर सुनवाई नहीं की गई थी.

सजा के आदेश में पिंटू, अंबुज, राजित, अनुपम, स्वदेश और तमाल मंडल को चेतावनी देकर रिहा किया गया, वहीं, पोल्टू मंडल को मारपीट के लिए छह माह का साधारण कारावास और तीन हजार रुपये जुर्माना तथा गलत तरीके से रोकने के लिए एक माह का साधारण कारावास और एक हजार रुपये जुर्माना लगाया गया. दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी. जुर्माना नहीं देने पर अतिरिक्त कारावास का प्रावधान भी किया गया है.

