New Delhi. सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस महानिदेशकों (डीजीपी) की नियुक्ति से जुड़े मामले में अपनी समीक्षा का दायरा मंगलवार को बढ़ाते हुए केंद्र सरकार से कहा कि वह सभी राज्यों में पुलिस प्रमुखों के चयन एवं नियुक्ति के लिए लागू कानूनों, नियमों और प्रशासनिक व्यवस्थाओं का सार उपलब्ध कराए। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की खंडपीठ ने झारखंड सरकार एवं राज्य की पुलिस महानिदेशक तदाशा मिश्रा को भी 16 नवंबर तक जवाब दाखिल करने को कहा। मिश्रा को उनकी सेवानिवृत्ति से एक दिन पहले पुलिस प्रमुख नियुक्त किया गया था।

केंद्र और अन्य ने उनकी नियुक्ति को चुनौती देते हुए याचिका दायर की है। प्रधान न्यायाधीश ने मामले में न्याय मित्र के रूप में पीठ की सहायता कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता राजू रामचंद्रन की दलीलों से सहमति जताते हुए कहा, ‘‘मुझे लगता है कि राजू सही कह रहे हैं कि केंद्र सरकार हमें डीजीपी की नियुक्ति के संबंध में प्रत्येक राज्य में लागू कानूनों, नियमों और प्रशासनिक व्यवस्थाओं का सार उपलब्ध करा सकती है।’’

रामचंद्रन ने उच्चतम न्यायालय से अनुरोध किया कि वह केंद्र और राज्य सरकारों को यह बताने का निर्देश दे कि क्या उन्होंने डीजीपी की नियुक्ति के लिए कोई कानून बनाया है या नियम निर्धारित किए हैं और इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि क्या इन प्रावधानों का पालन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कुछ राज्यों ने झारखंड की तरह ही नियम बनाए हैं, लेकिन वे अब भी दावा कर रहे हैं कि वे उच्चतम न्यायालय के प्रकाश सिंह मामले में दिए गए निर्देशों का पालन कर रहे हैं। उन्होंने विशेष रूप से उत्तर प्रदेश और पंजाब का उल्लेख किया, जहां इसी तरह के प्रावधान होने की बात कही गई है।
रामचंद्रन ने कहा कि इस मुद्दे की समग्र समीक्षा करने के लिए विभिन्न राज्यों में लागू कानूनी और प्रशासनिक व्यवस्थाओं का व्यापक आकलन जरूरी है, ताकि न्यायालय केवल अलग-अलग राज्यों के नियमों की वैधता पर विचार करने तक सीमित न रहे। शीर्ष अदालत ने झारखंड की डीजीपी को 16 नवंबर, 2026 तक जवाबी हलफनामा दाखिल करने का मौका भी दिया।
