Jamshedpur. सिदगोड़ा टाउन हॉल में डीएमएफटी की न्यास परिषद की बैठक हुई। उपायुक्त राजीव रंजन की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में खनन प्रभावित क्षेत्रों के समग्र विकास के लिए योजनाओं के चयन और प्राथमिकता निर्धारण पर चर्चा की गई। बैठक में जनप्रतिनिधियों के प्रतिनिधि, विभिन्न पंचायतों के मुखिया, उप विकास आयुक्त नागेन्द्र पासवान, जिला खनन पदाधिकारी, जिला योजना पदाधिकारी सहित संबंधित विभागों के अधिकारी शामिल हुए। बैठक में उपायुक्त ने बताया कि जिले के 1,506 गांव खनन गतिविधियों से प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित हैं, जबकि 200 से अधिक गांवों पर अप्रत्यक्ष प्रभाव पड़ता है। इस तरह 1,700 से अधिक गांवों के विकास और वहां रहने वाले लोगों के कल्याण की जिम्मेदारी डीएमएफटी के सामने है। प्रभावित गांवों की संख्या को देखते हुए सालाना मिलने वाली 12 से 13 करोड़ रुपये की राशि सीमित है।

इसलिए योजनाओं का चयन वास्तविक जरूरत, उपयोगिता और प्राथमिकता के आधार पर करना जरूरी है। जिले के सभी 11 प्रखंडों में दो अक्टूबर को आयोजित ग्राम सभाओं के माध्यम से खनन प्रभावित क्षेत्रों की जरूरतों के अनुसार योजनाओं के प्रस्ताव मांगे गए थे। इसके तहत 5,000 से अधिक प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इन प्रस्तावों में गांवों की बुनियादी सुविधाओं, शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला एवं बाल विकास, कौशल विकास और आधारभूत संरचना से जुड़ी आवश्यकताओं को सामने रखा गया है।

अब इन प्रस्तावों पर जनप्रतिनिधियों और संबंधित अधिकारियों के साथ विचार-विमर्श कर आपसी सहमति से प्राथमिकताएं तय की जाएंगी। इसके बाद योग्य योजनाओं को पारित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। हालांकि, सभी 5,000 प्रस्तावों को मंजूरी मिलने की बात अभी सामने नहीं आई है। उपायुक्त राजीव रंजन ने स्पष्ट किया कि डीएमएफटी की राशि का इस्तेमाल ऐसी योजनाओं में किया जाना चाहिए, जिनका लाभ किसी एक व्यक्ति के बजाय बड़े समुदाय को मिले। उन्होंने विद्यालयों में अतिरिक्त कक्षों के निर्माण, आंगनबाड़ी केंद्रों के निर्माण और सड़कों जैसी सामुदायिक उपयोगिता वाली योजनाओं को प्राथमिकता देने पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि सीमित संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग जरूरी है। योजनाओं का चयन इस तरह किया जाए कि खनन प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाली अधिक से अधिक आबादी को उसका लाभ मिल सके और विकास कार्यों का असर लंबे समय तक दिखाई दे।
जोहार मार्ट को बताया सामुदायिक विकास की पहल
उपायुक्त ने कहा कि डीएमएफटी की राशि का उपयोग व्यापक जनहित को ध्यान में रखकर होना चाहिए। शहरी क्षेत्र में जोहार मार्ट का निर्माण भी सामुदायिक उपयोगिता की इसी सोच का उदाहरण है। उन्होंने कहा कि योजनाओं की उपयोगिता, सामुदायिक लाभ और क्षेत्र की वास्तविक जरूरत को ध्यान में रखकर ही राशि खर्च की जानी चाहिए।
बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि खनन से प्रभावित क्षेत्रों के लोगों को विकास योजनाओं का वास्तविक लाभ मिले। अब 5,000 से अधिक प्रस्तावों में से प्राथमिकता के आधार पर योजनाओं का चयन और उनके क्रियान्वयन की दिशा में अगला कदम उठाया जाएगा।

