


मुंबई : भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) खिलाड़ियों के परिवार के साथ यात्रा करने के नियमों में बदलाव पर विचार कर रहा है. रिपोर्ट्स के अनुसार, बीसीसीआई विदेश दौरे पर खिलाड़ियों के परिवार के साथ रहने की अवधि को लेकर नए दिशा-निर्देश जारी करने की योजना बना रहा है. खिलाड़ियों को अपने परिवार के साथ यात्रा पर अधिक समय बिताने के लिए अब बोर्ड से विशेष अनुमति लेनी होगी.
इस बदलाव की चर्चा तब शुरू हुई, जब भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान विराट कोहली ने विदेशी दौरे के दौरान खिलाड़ियों के परिवार के साथ रहने की अवधि को लेकर अपनी राय साझा की थी. विराट ने कहा था कि जब खिलाड़ी मानसिक दबाव का सामना कर रहा होता है या वह खराब दौर से गुजर रहा होता है, तो उस समय परिवार का साथ बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है. उनका यह बयान बीसीसीआई के मौजूदा नियमों के खिलाफ था, जिनके तहत खिलाड़ियों को केवल निर्धारित समय तक ही अपने परिवार को साथ रखने की अनुमति है.
बीसीसीआई के एक सूत्र के अनुसार, बोर्ड अब इस नियम में बदलाव करने पर विचार कर रहा है, ताकि खिलाड़ियों को परिवार के साथ ज्यादा समय बिताने का अवसर मिल सके. हालांकि, यह भी स्पष्ट किया गया है कि परिवार के साथ अधिक समय बिताने के लिए खिलाड़ियों को पहले से बोर्ड से अनुमति प्राप्त करनी होगी.
भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी के दौरान भारतीय टीम को मिली हार के बाद बीसीसीआई ने इस नए नियम की शुरुआत की थी. इसके तहत, 45 दिन के लंबे दौरे पर खिलाड़ियों के परिवार के सदस्य अधिकतम दो सप्ताह तक ही उनके साथ रह सकते हैं. वहीं, छोटे दौरे पर यह अवधि केवल एक सप्ताह तक सीमित रहती है. इस नीति का उद्देश्य यह था कि खिलाड़ी अपनी पूरी ऊर्जा और ध्यान अपने खेल पर केंद्रित कर सकें, जबकि परिवार के साथ समय बिताने की इच्छा को भी सीमित किया जाए.
विराट कोहली ने इस नियम पर अपनी चिंता जताते हुए कहा था कि यह समझाना बहुत मुश्किल होता है कि जब खिलाड़ी विदेश में होते हैं और खेल के दौरान मुश्किल दौर से गुजर रहे होते हैं, तो परिवार का साथ कितना महत्वपूर्ण हो सकता है. उन्होंने यह भी कहा कि कुछ लोग जो खिलाड़ियों के जीवन और मानसिक स्थिति से अवगत नहीं होते, वे इस नियम को समर्थन दे रहे हैं, जबकि उन्हें इन पहलुओं को समझने की जरूरत है.
कोहली ने अपनी बात को विस्तार से रखते हुए कहा कि उन्हें यह बात बहुत निराशाजनक लगती है कि बाहरी लोग, जिनका खिलाड़ियों के जीवन से कोई लेना-देना नहीं है, वे ऐसे फैसलों को प्रभावित करते हैं. उनका मानना था कि अगर किसी खिलाड़ी से पूछा जाए, तो वह हमेशा चाहेंगे कि उनका परिवार उनके पास रहे, क्योंकि अकेले होने पर मानसिक दबाव और तनाव बढ़ सकता है.



