



Jamshedpur: भीषण गर्मी के बीच लौहनगरी जमशेदपुर समेत पूर्वी सिंहभूम जिले के कई क्षेत्रों में बदहाल बिजली व्यवस्था और बढ़ते पेयजल संकट को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने झामुमो-कांग्रेस सरकार के खिलाफ सड़क पर उतरकर प्रदर्शन किया।
गांव से लेकर शहर तक अनियमित बिजली आपूर्ति, घंटों की अघोषित कटौती, ठप जलापूर्ति, खराब चापाकल और सूखते जलस्रोतों से त्रस्त जनता की आवाज को बुलंद करने के लिए भाजपा जमशेदपुर महानगर अध्यक्ष के नेतृत्व में हजारों कार्यकर्ताओं ने गुरुवार को आक्रोश मार्च निकालकर जिला उपायुक्त कार्यालय पर जोरदार प्रदर्शन किया।
इस प्रदर्शन में पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास, जमशेदपुर पूर्वी की विधायक पूर्णिमा साहू, झारखंड भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता अमरप्रीत सिंह काले समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।

प्रदर्शन के पश्चात पार्टी के प्रतिनिधिमंडल ने जिला उपायुक्त के द्वारा मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नाम ज्ञापन सौंपकर अविलंब बिजली-पानी संकट को दूर करने की मांग की।
ज्ञापन में भाजपा ने राज्य सरकार पर जनता को बुनियादी सुविधाओं से वंचित करने का आरोप लगाते हुए कहा है कि जमशेदपुर में बिजली और पानी की स्थिति पूरी तरह बदहाल हो चुकी है। जिले के शहरी इलाकों से लेकर सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों तक लोग भीषण गर्मी में बिजली-पानी के संकट से कराह रहे हैं। कई इलाकों में चापाकल महीनों से खराब पड़े हैं, जलमीनारों से नियमित आपूर्ति नहीं हो रही और जलस्रोत सूखने लगे हैं।
इससे पहले, साकची स्थित जिला कार्यालय से कार्यकर्ताओं ने झंडा, बैनर, घड़ा और तख्तियां लेकर पैदल मार्च करते हुए जिला उपायुक्त कार्यालय कूच किया, जहां महिलाओं ने जलसंकट पर आक्रोश जताते हुए घड़ा फोड़कर सरकार के खिलाफ विरोध दर्ज किया।
इस दौरान कार्यकर्ताओं ने झामुमो-कांग्रेस सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं में आक्रोश देखा गया। इस दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के खिलाफ भी कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी की।
प्रदर्शन के दौरान मीडिया को संबोधित करते हुए राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा कि नागरिकों के मूलभूत सुविधाओं की पूर्ति किसी भी सरकार का पहला धर्म होता है। जिसमें यह सरकार पूरी तरह से विफल रही है। उन्होंने बागबेड़ा वृहद जलापूर्ति योजना के अबतक पूरा नहीं किए जाने पर राज्य सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि इस महत्वकांक्षी योजना की शुरुआत वर्ष 2015 में उनके ही कार्यकाल में हुई परंतु इतने लंबे समय बीतने के बाद भी यह योजना सरकार की अनदेखी के कारण अधर में लटकी हुई है। जिससे हजारों लोगों को पानी की किल्लत का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि जमशेदपुर सहित पूरे राज्य में बिजली की आंख मिचौली से जनता त्रस्त है। हाल के दिनों में बिजली संकट का जिक्र करते हुए कहा कि सरायकेला-खरसावां जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में प्रसव के दौरान अस्पताल की बिजली गुल हो जाने के कारण नर्सों ने मोबाइल के टॉर्च की रोशनी में प्रसव कराने का प्रयास किया, जिसमें जच्चा-बच्चा दोनों की मौत हो गई। पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने इसे सरकार की बड़ी विफलता बताते हुए कहा कि ऐसी निरंकुश और अकर्मण्य सरकार को एक मिनट भी सत्ता में बने रहने का नैतिक अधिकार नहीं है।
विधायक पूर्णिमा साहू ने कहा कि जमशेदपुर में कोल्हान के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल एमजीएम अस्पताल में भीषण जल संकट है, जहाँ दर्जनों वॉटर प्यूरीफायर खराब होने से मरीज एवं उनके परिजन पीने के पानी के लिए तरस रहे हैं। हालत यह है कि मरीज बाथरूम के पानी पीने को मजबूर हैं। पानी की कमी के कारण जरूरी ऑपरेशन भी टल रहे हैं। परंतु स्वास्थ्य मंत्री स्वास्थ्य विभाग की समस्या दूर करने के बजाय अनावश्यक बयानबाजी और अन्य विषयों की चिंता में व्यस्त रहते हैं। उन्होंने कहा कि इस भीषण गर्मी में जमशेदपुर के कई हिस्सों में नियमित जलापूर्ति बाधित है, तो कई क्षेत्र में जलमीनार के मोटर खराब पड़े हैं। उन्होंने इन सब पर राज्य सरकार से अविलंब कार्रवाई कर लोगों को राहत देने की मांग की।
झारखंड भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता अमरप्रीत सिंह काले ने बिजली-पानी के बढ़ते संकट को लेकर राज्य सरकार पर अनदेखी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार जन समस्याओं को लेकर पूरी तरह लापरवाह बनी हुई है। जहां तक बिजली का सवाल है 200 यूनिट फ्री का वादा केवल ढकोसला है और जनता को चिढ़ा रहा है। आलम ये है कि राजधानी रांची में 10- 12 घंटे से ज्यादा बिजली नहीं रह रही है। तो फिर अन्य जिलों और सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। राज्य सरकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की महात्वाकांक्षी योजना हर घर नल जल को लटकने भटकाने और इसे विफल करने में अपनी पूरी ताकत लगा दी है। आज स्थिति है कि झारखंड नल जल योजना की दृष्टि से नीचे के दूसरे पायदान पर खड़ा है। कई राज्यों ने जहां इस योजना को 100 प्रतिशत पूरे कर लिए हैं। तो वहीं, झारखंड में यह योजना कागज पर भी मात्र 45% पूरी हो पाई है।



