


Ranchi. नक्सल रोधी अभियान ग्रिड में तैनात सुरक्षा बलों ने देश में वामपंथी उग्रवाद को खत्म करने के लिए तय केंद्र सरकार की 31 मार्च की समय सीमा में एक सप्ताह से भी कम समय शेष रहने के बीच बचे हुए हथियारबंद माओवादी कैडर को खत्म करने के लिए बड़ा अभियान शुरू किया है। केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की लगभग तीन से चार कोबरा इकाइयों को छत्तीसगढ़ से झारखंड भेजा जा रहा है ताकि पश्चिमी सिंहभूम जिले के सारंडा जंगलों में विशेष अभियान चलाया जा सके।
सीएपीएफ के एक शीर्ष कमांडर ने कहा, ‘योजना यह है कि 31 मार्च तक हथियारबंद नक्सलियों को शत प्रतिशत निष्क्रिय कर दिया जाए; यह समय सीमा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने घोषित की है। यह या तो मुठभेड़ों के जरिए होगा या फिर उनके आत्मसमर्पण से।’ उन्होंने कहा, ‘इस उलटी गिनती के आखिरी 5-6 दिन में कुछ बड़े अभियान चलाए जा रहे हैं। सुरक्षा बल अब भी लगभग 130-150 हथियारबंद कैडरों, प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) की केंद्रीय समिति के दो सदस्यों और कुछ अन्य डिविजनल-रैंक के नक्सलियों पर नजर रख रहे हैं।
मिसिर बेसरा उर्फ भास्कर के बारे में कहा जाता है कि वह झारखंड में सक्रिय है और कोबरा की टीमें उसकी और उसके साथियों की तलाश कर रही हैं।
सूत्रों ने बताया कि सीएपीएफ और राज्य पुलिस बलों से नक्सली हिंसा प्रभावित क्षेत्रों में छिपी बारूदी सुरंगों और बमों का पता लगाने और उन्हें निष्क्रिय करने के लिए एक संयुक्त अभियान चलाने को भी कहा गया है। यह अभियान अगले महीने से जोर पकड़ेगा। सूत्रों के अनुसार ‘ब्लैक कैट्स’ कमांडो बल एनएसजी और सीआरपीएफ के बम निरोधक दस्ते इस काम का नेतृत्व करेंगे। फरवरी में गृह मंत्रालय ने नक्सली हिंसा प्रभावित क्षेत्रों की नये सिरे से समीक्षा की और सूचित किया कि देश में वामपंथी उग्रवाद प्रभावित जिलों की संख्या सात है।



