

सरायकेला: सरायकेला-खरसावां समाहरणालय में एसआईआर (Special Intensive Revision) को लेकर आयोजित बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री चम्पाई सोरेन ने कपाली क्षेत्र की मतदाता सूची और बदलती जनसांख्यिकी को लेकर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने प्रशासन से एसआईआर के दौरान कपाली क्षेत्र से मिल रही शिकायतों पर विशेष ध्यान देने और मामलों की जांच कराने की मांग की।
कोल्हान आयुक्त की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में चम्पाई सोरेन ने दावा किया कि कपाली क्षेत्र की वर्तमान स्थिति और वर्ष 1995 की मतदाता सूची में काफी अंतर दिखाई देता है। उन्होंने प्रशासन के समक्ष स्थानीय ग्रामीणों की शिकायतों और जमीन से जुड़े मामलों को भी उठाया।
1995 की वोटर लिस्ट का हवाला देकर उठाए सवाल
चम्पाई सोरेन ने कहा कि वर्ष 1995 की मतदाता सूची देखने पर कपाली क्षेत्र में मांझी, टुडू, महतो, मंडल, कुंभकार समेत आदिवासी और मूलवासी समाज के लोगों के नाम दिखाई देते थे। उनका आरोप है कि पिछले कुछ वर्षों में क्षेत्र की जनसांख्यिकी में बड़ा बदलाव आया है।
उन्होंने आरोप लगाया कि स्थानीय लोगों की जमीन पर कब्जा कर बाहरी लोगों को बसाया गया है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस खबर के समय नहीं हुई है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि कभी कपाली पंचायत के अंतर्गत डांगरडीह, बांधगोड़ा, हांसाडूंगरी, केंदडीह और कालियाडूंगरी जैसे गांव आते थे। उनके अनुसार, वर्तमान में इन गांवों का स्वरूप काफी बदल गया है और कई इलाकों का पुराना अस्तित्व लगभग समाप्त हो गया है।
सीएनटी एक्ट के बावजूद जमीन कब्जाने का आरोप
चम्पाई सोरेन ने सवाल उठाया कि सीएनटी एक्ट लागू होने के बावजूद कपाली क्षेत्र में बड़ी संख्या में एक समुदाय विशेष के लोगों के बसने की स्थिति कैसे बनी। उन्होंने प्रशासन से यह स्पष्ट करने की मांग की कि स्थानीय आदिवासी और मूलवासी लोगों की जमीनों के संबंध में किन परिस्थितियों में बदलाव हुआ।
उन्होंने दावा किया कि कई स्थानीय ग्रामीणों के पास जमीन के खतियान और अन्य दस्तावेज मौजूद हैं, इसके बावजूद उनकी जमीनों पर कब्जा किया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अब ऐसे लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाने की कोशिश की जा रही है।
दो वर्षों से शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं होने का आरोप
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि स्थानीय ग्रामीण पिछले दो वर्षों से अपनी शिकायतों को लेकर सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं। उन्होंने प्रशासन से सवाल किया कि जिन लोगों के नाम खतियान में दर्ज हैं, उनके मतदाता अधिकारों और जमीन से जुड़े मामलों की जांच किस आधार पर की जा रही है।
उन्होंने कपाली की रहने वाली हुना मांझी और फातमा खातून के नामों को जोड़ने का उदाहरण देते हुए एसआईआर प्रक्रिया में इस तरह की प्रविष्टियों की जांच की मांग की। चम्पाई सोरेन ने आरोप लगाया कि ऐसे मामलों के कारण आदिवासी और मूलवासी लोगों के मताधिकार पर असर पड़ रहा है।
संदिग्ध घुसपैठियों की जांच की मांग
चम्पाई सोरेन ने झारखंड के सभी जिलों में डिटेंशन सेंटर बनाने और संदिग्ध बांग्लादेशी घुसपैठियों को जांच प्रक्रिया के तहत वहां रखने की मांग की। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान संदिग्ध मामलों की निष्पक्ष और दस्तावेज आधारित जांच होनी चाहिए।
उन्होंने प्रशासन से कपाली क्षेत्र से प्राप्त शिकायतों को गंभीरता से लेने और एसआईआर प्रक्रिया में सभी दावों एवं आपत्तियों की नियमानुसार जांच करने का आग्रह किया।
अधिकारियों ने जांच का दिया भरोसा
पूर्व मुख्यमंत्री द्वारा कपाली और एसआईआर से जुड़े मुद्दे उठाए जाने के बाद बैठक में मौजूद वरीय अधिकारियों ने पूरे मामले की जांच करने की बात कही। प्रशासन की ओर से शिकायतों और संबंधित दस्तावेजों की जांच के बाद नियमानुसार कार्रवाई का आश्वासन दिया गया।

