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    Home»Breaking News»Court Dicision: अग्रिम जमानत खारिज करें, पर सरेंडर का आदेश नहीं दे सकतीं अदालतें, सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड से जुड़े मामले में दिया फैसला
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    Court Dicision: अग्रिम जमानत खारिज करें, पर सरेंडर का आदेश नहीं दे सकतीं अदालतें, सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड से जुड़े मामले में दिया फैसला

    News DeskBy News DeskApril 27, 2026
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    Ranchi. सुप्रीम कोर्ट ने अग्रिम जमानत और अदालती क्षेत्राधिकार को लेकर एक अत्यंत महत्वपूर्ण कानूनी व्यवस्था दी है. जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की खंडपीठ ने स्पष्ट किया है कि अदालतों के पास अग्रिम जमानत याचिका खारिज करने का अधिकार तो है, लेकिन वे आरोपी को निचली अदालत में आत्मसमर्पण करने के लिए बाध्य नहीं कर सकतीं. शीर्ष अदालत ने कहा कि ऐसा निर्देश देना पूरी तरह से क्षेत्राधिकार का उल्लंघन है.

    खंडपीठ ने यह टिप्पणी धोखाधड़ी और जालसाजी के एक आरोपी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान की. सुप्रीम कोर्ट का तर्क है कि अग्रिम जमानत का मूल उद्देश्य गिरफ्तारी से कानूनी सुरक्षा प्रदान करना है. यदि अदालत को लगता है कि आरोपी राहत का हकदार नहीं है, तो वह याचिका अस्वीकार कर सकती है, लेकिन वह आरोपी को सरेंडर करने का आदेश देकर उसके कानूनी विकल्पों को सीमित नहीं कर सकती. यह पूरा मामला झारखंड से जुड़ा है,

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    जहां भूमि विवाद से संबंधित धोखाधड़ी (धारा 420) और जालसाजी (धारा 468, 471) के एक मामले में आरोपी ने हाइकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. झारखंड हाइकोर्ट ने आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका तो खारिज की ही थी, साथ ही उसे निचली अदालत में सरेंडर करने और वहां से नियमित जमानत मांगने का निर्देश भी दिया था.

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    but courts cannot order surrender Court Decision: Reject anticipatory bail Court Dicision: अग्रिम जमानत खारिज करें Supreme Court gives decision in a case related to Jharkhand पर सरेंडर का आदेश नहीं दे सकतीं अदालतें सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड से जुड़े मामले में दिया फैसला
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