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Dicision on Dispute Land: जमीन विवाद पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, विवादित जमीन का सीमांकन अब अंचल स्तर के अधिकारी नहीं करेंगे

Ranchi. झारखंड हाईकोर्ट ने जमीन विवाद से जुड़े मामलों में एक ऐतिहासिक और दूरगामी असर वाला फैसला सुनाया है। कोर्ट ने साफ कहा कि दो निजी पक्षों के बीच विवादित जमीन का सीमांकन (नापी) अब अंचल स्तर के अधिकारी नहीं करेंगे। जस्टिस आनंदा सेन की अदालत ने इस प्रक्रिया पर अगली सुनवाई तक पूरी तरह रोक लगा दी है। इस फैसले से राज्य के सैकड़ों जमीन विवादों पर सीधा असर पड़ेगा। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि यदि दो व्यक्तियों के बीच किसी जमीन को लेकर विवाद है, तो उसका हल प्रशासनिक स्तर पर नहीं बल्कि सिविल कोर्ट के जरिए होना चाहिए।

कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि सीमांकन एक न्यायिक प्रकृति का कार्य है, जिसे प्रशासनिक अधिकारियों को सौंपना उचित नहीं है। अदालत ने सुझाव दिया कि विवादित जमीनों का सीमांकन कोर्ट कमिश्नर की नियुक्ति करके कराया जाए, ताकि पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित हो सके।

यह आदेश रुक्मणी देवी नामक महिला की याचिका पर सुनवाई के दौरान आया। याचिकाकर्ता ने दलील दी कि अंचल अधिकारियों को निजी जमीन का सीमांकन करने का कोई वैधानिक अधिकार नहीं है। यह अधिकार केवल न्यायालय को होना चाहिए, क्योंकि यह विवादित संपत्ति से जुड़ा संवेदनशील मुद्दा है। कोर्ट ने इस दलील को गंभीरता से लेते हुए प्रशासनिक प्रक्रिया पर रोक लगा दी।

सरकार से मांगा जवाब
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह शपथ पत्र दाखिल कर स्पष्ट करे कि आखिर किस कानून के तहत अंचल अधिकारियों को जमीनों की नापी का अधिकार दिया गया है? साथ ही, झारखंड गठन के बाद कैबिनेट के जिस निर्णय के आधार पर यह शक्ति अधिकारियों को दी गई थी, उसकी वैधता पर भी सवाल उठाए गए। कोर्ट ने कहा कि न्यायिक शक्तियों को किसी प्रशासनिक अधिकारी को हस्तांतरित नहीं किया जा सकता।

इस फैसले के बाद पूरे झारखंड में जमीन विवाद के जितने भी मामले अंचल स्तर पर लंबित थे, वे अब स्थगित हो जाएंगे। अब लोगों को सीधे सिविल कोर्ट का दरवाजा खटखटाना होगा। हालांकि इससे प्रक्रिया थोड़ी लंबी हो सकती है, लेकिन यह पारदर्शिता और न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इस मामले की अगली सुनवाई छह सप्ताह बाद तय की गई है।

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