Close Menu
Lahar ChakraLahar Chakra
  • Jamshedpur
  • Jharkhand
  • Bihar
  • National
  • Politics
  • Crime
  • Elections
  • Automobile
Facebook X (Twitter) Instagram
Facebook X (Twitter) YouTube Instagram
Lahar ChakraLahar Chakra
  • Home
  • Jamshedpur
  • State
    • Jharkhand
    • Bihar
  • National
  • Politics
  • Crime
  • Elections
  • Automobile
Lahar ChakraLahar Chakra
  • Jamshedpur
  • Jharkhand
  • Bihar
  • National
  • Politics
  • Crime
  • Elections
  • Automobile
Home»Breaking News»Jamshedpur News :डोबो-कपाली में कृषि भूमि के बदलते नेचर पर पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने उठाए सवाल, कहा- अनुसूचित क्षेत्र की संवैधानिक व्यवस्था से हो रहा खिलवाड़
Breaking News

Jamshedpur News :डोबो-कपाली में कृषि भूमि के बदलते नेचर पर पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने उठाए सवाल, कहा- अनुसूचित क्षेत्र की संवैधानिक व्यवस्था से हो रहा खिलवाड़

News DeskBy News DeskSeptember 28, 2026
Facebook Twitter WhatsApp Telegram Email LinkedIn Copy Link
Share
Facebook Twitter WhatsApp Telegram LinkedIn Email Copy Link

पिछले दरवाजे से संविधान और अनुसूचित क्षेत्र के प्रावधानों को तोड़ा जा रहा है: अर्जुन मुंडा

● सरकार ईमानदार है तो भूमि उपयोग परिवर्तन पर श्वेत पत्र जारी करे: अर्जुन मुंडा

जमशेदपुर। झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा ने सोमवार को जमशेदपुर के निर्मल गेस्ट हाउस में आयोजित पत्रकार वार्ता में डोबो, कपाली समेत आसपास के अनुसूचित क्षेत्रों में कृषि भूमि के बदलते नेचर, बहुमंजिला भवनों के निर्माण, नदी क्षेत्र में हो रहे निर्माण और अनुसूचित क्षेत्र की संवैधानिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अनुसूचित क्षेत्र घोषित किए जाने के पीछे जिस संवैधानिक संरक्षण और सामाजिक-सांस्कृतिक संतुलन की भावना थी, उसका धीरे-धीरे उल्लंघन हो रहा है।

पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने कहा कि अनुसूचित क्षेत्रों में भूमि से जुड़े प्रावधानों को केवल राजस्व या निबंधन की प्रक्रिया तक सीमित करके नहीं देखा जा सकता। उन्होंने कहा कि छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम (CNT Act) और संविधान की पांचवीं अनुसूची के प्रावधानों के अनुरूप भूमि उपयोग और उसके नेचर में परिवर्तन को देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार कृषि भूमि का औद्योगिक प्रयोजन के लिए उपयोग एक निर्धारित प्रक्रिया के तहत किया जा सकता है, लेकिन आवासीय या व्यावसायिक उपयोग के लिए कृषि भूमि का बड़े पैमाने पर परिवर्तन अनुसूचित क्षेत्र की मूल व्यवस्था को प्रभावित कर सकता है।

उन्होंने विशेष रूप से डोबो क्षेत्र का उदाहरण देते हुए कहा कि पंचायती क्षेत्र में लगातार बहुमंजिला इमारतें बन रही हैं। उनका सवाल था कि केवल यह कहकर कि जमीन गैर-आदिवासी की है, उस पर मनमाने ढंग से बहुमंजिला निर्माण की अनुमति नहीं दी जा सकती। उन्होंने कहा कि अनुसूचित क्षेत्र में भूमि उपयोग से जुड़े निर्णय लेते समय केवल जमीन के मालिकाना स्वरूप को नहीं, बल्कि पांचवीं अनुसूची के संवैधानिक उद्देश्य, स्थानीय व्यवस्था और जनसंख्या संतुलन को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।

*रजिस्ट्री के समय ही कृषि भूमि का नेचर नहीं बदला जा सकता*

अर्जुन मुंडा ने निबंधन प्रक्रिया पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि कृषि भूमि की रजिस्ट्री कृषि भूमि के रूप में ही होनी चाहिए। यदि खरीदार बाद में उसका व्यावसायिक, औद्योगिक अथवा अन्य उपयोग करना चाहता है, तो इसके लिए संबंधित सक्षम प्राधिकारी से नियमानुसार अलग अनुमति ली जानी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि रजिस्ट्री के समय ही कृषि भूमि पर व्यावसायिक दर या उपयोग का आधार निर्धारित कर दिया जाता है, तो इससे भूमि के मूल स्वरूप में बदलाव का रास्ता खुल जाता है। उन्होंने कहा कि इस पूरी प्रक्रिया की समीक्षा की जरूरत है और अब तक दिए गए ऐसे सभी अनुमतियों एवं स्वीकृतियों की जांच होनी चाहिए। उनका कहना था कि यदि किसी निर्माण में नियमों का उल्लंघन प्रमाणित होता है तो संबंधित अनुमति रद्द कर अवैध निर्माण पर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

प्रेस वार्ता में भाजपा जमशेदपुर महानगर अध्यक्ष संजीव सिन्हा, जिला महामंत्री राजीव सिंह, जितेंद्र राय एवं जिला मीडिया प्रभारी प्रेम झा भी मौजूद रहे।

*कपाली के परिसीमन और अनुसूचित क्षेत्र के दर्जे पर भी सवाल*

प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने कपाली के पंचायती क्षेत्र के शहरी क्षेत्र में शामिल होने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि अनुसूचित क्षेत्र की सीमाओं के निर्धारण और उसमें बदलाव को लेकर गंभीरता से समीक्षा की आवश्यकता है। उनके अनुसार सीमांकन में किसी प्रकार की त्रुटि का सीधा प्रभाव भविष्य में परिसीमन और अनुसूचित समुदायों के संवैधानिक अधिकारों पर पड़ सकता है।

उन्होंने कहा कि अनुसूचित क्षेत्रों के संरक्षण का उद्देश्य केवल भूमि की रक्षा करना नहीं, बल्कि वहां की सामाजिक, सांस्कृतिक और प्रशासनिक व्यवस्था को भी संरक्षित रखना है। उन्होंने पेसा कानून, ग्रामसभा और पंचायत व्यवस्था के अधिकारों के संदर्भ में भी सवाल उठाए।

Jamshedpur: ब्रह्मर्षि विकास मंच महिला समिति का मानगो मूनसिटी में हुआ गठन , रंजू सिंह अध्यक्ष, चिंटू शर्मा महासचिव एवं वंदना रंजन बनी कोषाध्यक्ष 

*सरकार श्वेत पत्र जारी कर बताए, किसने दी अनुमति*

पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने राज्य सरकार से मांग किया कि अनुसूचित क्षेत्रों में कृषि भूमि के नेचर बदलने, बड़े भवनों के निर्माण और भूमि उपयोग परिवर्तन से संबंधित अब तक की पूरी प्रक्रिया की समीक्षा कराई जाए। उन्होंने कहा कि सरकार श्वेत पत्र जारी कर यह स्पष्ट करे कि किन अधिकारियों ने किस आधार पर ऐसी अनुमतियां दीं और नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर उनके विरुद्ध क्या कार्रवाई हुई।

उन्होंने कहा कि यदि किसी अधिकारी या सक्षम संस्था की अनुमति नियमों के विपरीत पाई जाती है तो उसे निरस्त किया जाना चाहिए और अवैध पाए गए निर्माणों पर कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए।

*दलमा और हाथी कॉरिडोर को लेकर भी जताई चिंता*

अर्जुन मुंडा ने दलमा पहाड़ी के आसपास तेजी से हो रहे निर्माण को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि दलमा क्षेत्र वन्यजीवों और विशेष रूप से हाथियों के आवागमन के लिहाज से संवेदनशील है। उन्होंने पूर्व में हाथी कॉरिडोर से जुड़े विषयों और पर्यावरणीय चिंताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि विकास कार्यों के साथ वन्यजीवों के आवागमन और पर्यावरणीय संतुलन का ध्यान रखना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि दलमा के आसपास गगनचुंबी इमारतों के निर्माण से क्षेत्र का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। कृषि भूमि का व्यावसायिक उपयोग बढ़ने से वन्यजीवों के प्राकृतिक मार्ग प्रभावित हो सकते हैं और इसका असर अंततः मानव-वन्यजीव संघर्ष के रूप में सामने आ सकता है।

*स्वर्णरेखा नदी के किनारे निर्माण पर जांच की मांग*

अर्जुन मुंडा ने स्वर्णरेखा नदी के किनारे हो रहे निर्माण को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि नदी के पुराने बाढ़ स्तर और जल प्रवाह क्षेत्र को ध्यान में रखे बिना यदि निर्माण की अनुमति दी गई है तो इसकी जांच आवश्यक है।

उन्होंने पत्रकारों के सामने उपलब्ध तस्वीरों का उल्लेख करते हुए कहा कि नदी के आसपास कई स्थानों पर भराव और निर्माण के कारण नदी का प्राकृतिक क्षेत्र संकरा होता दिखाई दे रहा है। उन्होंने आशंका जताई कि भविष्य में भारी बारिश अथवा जलाशयों से पानी छोड़े जाने की स्थिति में ऐसे निर्माण आम लोगों के लिए खतरा बन सकते हैं।

उन्होंने सरकार से मांग की कि स्वर्णरेखा और खरकई नदी के आसपास के निर्माणों की तकनीकी एवं पर्यावरणीय जांच कराई जाए तथा यदि किसी भवन का निर्माण नियमों के विरुद्ध पाया जाता है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

JAMSHEDPUR NEWS: दलमा इको-सेंसिटिव जोन में अवैध क्रशर सील, खनिज और उपकरण जब्त

*आदिवासी आबादी कहां गई, सरकार को देना होगा जवाब*

अर्जुन मुंडा ने अनुसूचित क्षेत्रों के भविष्य के परिसीमन और वहां की आदिवासी आबादी के सवाल को भी इस पूरे विषय से जोड़ा। उन्होंने कहा कि यदि किसी क्षेत्र को अनुसूचित क्षेत्र के दर्जे से हटाने अथवा उसकी स्थिति में परिवर्तन की बात होती है तो पहले यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि वहां ऐतिहासिक रूप से रहने वाली जनजातीय आबादी की वर्तमान स्थिति क्या है और उनके विस्थापन के कारण क्या रहे। उन्होंने कहा कि भूमि उपयोग में बदलाव, अनियोजित निर्माण और आबादी में बदलाव का प्रभाव केवल वर्तमान प्रशासनिक व्यवस्था पर नहीं पड़ता, बल्कि भविष्य में परिसीमन और स्थानीय समुदायों के प्रतिनिधित्व पर भी पड़ सकता है।

*भूमि विवाद बढ़ने से कानून-व्यवस्था पर भी असर*

पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने कहा कि भूमि विवाद अब केवल राजस्व अथवा जमीन के स्वामित्व का विषय नहीं रह गया है। उन्होंने इसे स्थानीय स्तर पर कानून-व्यवस्था से भी जोड़ते हुए कहा कि जमीन से जुड़े विवादों के कारण तनाव और आपराधिक घटनाओं की स्थिति पैदा हो सकती है।

उन्होंने हाल के दिनों में हुई आपराधिक घटनाओं और जमीन विवादों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रशासन को भूमि से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए। अगस्त में पश्चिमी सिंहभूम के टोंटो क्षेत्र में जमीन विवाद से जुड़े एक आदिवासी परिवार के तीन सदस्यों की हत्या के बाद अर्जुन मुंडा ने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर सुरक्षा की मांग की थी।

*विकास जरूरी, लेकिन संवैधानिक और पर्यावरणीय प्रावधानों की अनदेखी नहीं*

अर्जुन मुंडा ने कहा कि वे औद्योगिक विकास या रोजगार के अवसरों के विरोध में नहीं हैं। उनका कहना था कि उद्योगों के लिए भूमि उपलब्ध कराने की प्रक्रिया कानून के अनुरूप होनी चाहिए, लेकिन आवासीय और व्यावसायिक निर्माण के नाम पर कृषि भूमि के बड़े पैमाने पर उपयोग परिवर्तन, नदी क्षेत्र में निर्माण तथा हाथी कॉरिडोर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों की अनदेखी नहीं की जा सकती।

उन्होंने कहा कि एक तरफ अनुसूचित क्षेत्रों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा जरूरी है, दूसरी तरफ नदी, जंगल और वन्यजीवों की सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने राज्य सरकार से पूरे मामले पर स्पष्ट नीति बनाने, भूमि उपयोग परिवर्तन की समीक्षा कराने और नियमों के उल्लंघन की स्थिति में जिम्मेदारी तय करने की मांग की।

पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने कहा कि अनुसूचित क्षेत्र, ग्रामसभा, पर्यावरण, नदी क्षेत्र और स्थानीय समुदायों के अधिकारों से जुड़े इन सभी पहलुओं को एक साथ देखकर ही आगे की नीति तय की जानी चाहिए।

 

Share. Facebook Twitter WhatsApp LinkedIn Telegram Email Copy Link

Related Posts

Jamshedpur: ब्रह्मर्षि विकास मंच महिला समिति का मानगो मूनसिटी में हुआ गठन , रंजू सिंह अध्यक्ष, चिंटू शर्मा महासचिव एवं वंदना रंजन बनी कोषाध्यक्ष 

September 29, 2026

JAMSHEDPUR NEWS: दलमा इको-सेंसिटिव जोन में अवैध क्रशर सील, खनिज और उपकरण जब्त

September 29, 2026

CHAIBASA NEWS: कोल्हान विश्वविद्यालय का सप्तम दीक्षांत समारोह संपन्न, 5,515 विद्यार्थियों को मिली उपाधि

September 29, 2026
Recent Post

Jamshedpur: ब्रह्मर्षि विकास मंच महिला समिति का मानगो मूनसिटी में हुआ गठन , रंजू सिंह अध्यक्ष, चिंटू शर्मा महासचिव एवं वंदना रंजन बनी कोषाध्यक्ष 

September 29, 2026

JAMSHEDPUR NEWS: दलमा इको-सेंसिटिव जोन में अवैध क्रशर सील, खनिज और उपकरण जब्त

September 29, 2026

CHAIBASA NEWS: कोल्हान विश्वविद्यालय का सप्तम दीक्षांत समारोह संपन्न, 5,515 विद्यार्थियों को मिली उपाधि

September 29, 2026

JAMSHEDPUR NEWS: मानगो में खुले में कचरा डंपिंग पर सरयू राय ने जताई चिंता, वैकल्पिक व्यवस्था का दिया सुझाव

September 29, 2026

RAILWAY NEWS: चक्रधरपुर मंडल में मेगा ब्लॉक से 5 ट्रेनें रद्द, उत्कल और साउथ बिहार एक्सप्रेस बदले मार्ग से चलेंगी

September 29, 2026
Advertisement
© 2026 Lahar Chakra. Designed by Launching Press.
  • Privacy Policy
  • Terms
  • Accessibility

Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.

Join Laharchakra Group