



Ranchi. झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मंगलवार को कहा कि उनकी सरकार प्रदर्शन कर रहे नौकरी के इच्छुक अभ्यर्थियों की ओर से उठाई गई चिंताओं को लेकर गंभीर है और इस संबंध में निर्णय उचित समय पर लिया जाएगा। सोरेन का यह बयान ऐसे समय आया है जब अभ्यर्थियों ने अपना आंदोलन तेज कर दिया है। ये अभ्यर्थी 29 जुलाई से रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में अनिश्चितकालीन धरना दे रहे हैं और उनकी मांग है कि झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) तथा अन्य भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच झारखंड से बाहर के उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की एक स्वतंत्र समिति से कराई जाए।
सोरेन ने रांची में संवाददाताओं से कहा, “उनकी मांगों और सवालों के समाधान से जुड़े फैसले पूरी गंभीरता और बारीकी से जांच के बाद उचित समय पर घोषित किए जाएंगे। मुझे विश्वास है कि प्रदर्शनकारी इससे आश्वस्त होंगे। सोरेन ने जांच का उल्लेख करते हुए कहा कि जांच एजेंसियां कथित अनियमितताओं के हर पहलू की पड़ताल कर रही हैं। उन्होंने कहा, “जिस तरह जांच टीम सक्रिय है, जहां भी किसी तरह की गलती हुई है या हो रही है, उन सभी चीजों की गहन जांच की जा रही है और सब कुछ सामने आने के बाद सरकार के फैसले भी निश्चित रूप से सामने आएंगे।”
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया है कि झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) नीत राज्य सरकार जांच राज्य सीआईडी को सौंपकर मामले को “रफा-दफा” करने का प्रयास कर रही है। इससे पहले उन्होंने कथित भर्ती घोटाले में बड़े पैमाने पर वित्तीय लेन-देन का दावा करते हुए केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से जांच कराने की मांग की थी। जेपीएससी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के मामले में सीआईडी अब तक 11 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। वहीं, आयोग ने बढ़ते विरोध प्रदर्शनों के बीच 25 से 27 जुलाई तक प्रस्तावित संयुक्त सिविल सेवा मुख्य परीक्षा को “अपरिहार्य परिस्थितियों” का हवाला देते हुए स्थगित कर दिया था।
सीआईडी ने कथित भर्ती अनियमितताओं की जांच के तहत जेपीएससी के पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते से 28 जुलाई से अब तक चार बार पूछताछ की है और रांची, पलामू, हजारीबाग, बोकारो तथा धनबाद में 18 स्थानों पर छापेमारी भी की है।


