




JAMSHEDPUR: पूर्वी सिंहभूम जिले के जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति अंतर्गत राजस्व चोरी एवं अवैध निर्माण आम बात हो गई है. झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन एवं नगर विकास मंत्री सुदीब्य कुमार भी भ्रष्टाचार में लिप्त अफ़सरों पर कार्रवाई करने के बजाय मौन दिख रहे हैं.
पूर्वी सिंहभूम जिले के जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति अंतर्गत मोतीलाल नेहरू पब्लिक स्कूल, सेंट मैरिज स्कूल समेत अन्य दर्जनों आवासीय एवं व्यवसायिक भवन बिना नक्शा स्वीकृत कराए अथवा स्वीकृत नक्शा का व्यापक रूप से उल्लंघन कर बन रहे हैं.
जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति के पदाधिकारीगण जिस अवैध निर्माण को चाहे पूरा करवाते हैं एवं जिस भी अवैध निर्माण को चाहे उस पर जुर्माना एवं अन्य विधि सम्मत कानूनी कार्रवाई कार्रवाई करते हैं.
जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति अंतर्गत बिना नक्शा स्वीकृत कराए अथवा स्वीकृत नक्शा का विचलन कर अवैध निर्माण होने से जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति को करोड़ों रुपये का नुकसान हो रहा है.
जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति अंतर्गत नियम-कायदों को ताक पर रखकर दर्जनों आवासीय व व्यावसायिक भवन निर्माण कार्य बिना परमिशन व नक्शा स्वीकृत कराये धड़ल्ले से हो रहा है. इससे JNAC प्रशासन को हर साल करोड़ों रुपये के राजस्व का घाटा उठाना पड रहा है.
JNAC क्षेत्र में बहुमंजिला भवन बनाने के लिए JNAC कार्यालय का आदेश जरूरी है़. भवन बनाने के लिए नक्शा पास होना चाहिए, लेकिन जमशेदपुर के JNAC क्षेत्र में बिना किसी आदेश के धड़ल्ले से बहुमंजिला भवन बनाये जा रहे हैं.
JNAC क्षेत्र में पदाधिकारियों के तालमेल के कारण ही संभवतः बिना किसी मापदंड एवं स्वीकृत नक्शा के भवनों का निर्माण कराया जा रहा है.
JNAC क्षेत्र में लगभग 70 प्रतिशत से ज्यादा भवन बिना अनुमति के बनाए जा रहे हैं. लोग JNAC क्षेत्र में नक्शा पास कराना ही जरूरी नहीं समझते हैं. जबकि JNAC क्षेत्र में होने वाले निर्माण कार्यों की निगरानी की जिम्मेदारी टाउन प्लानर एवं क्षेत्रीय कर्मचारी की है, लेकिन JNAC के टाउन प्लानर एवं क्षेत्रीय कर्मचारी इस दिशा में सक्रिय रवैया नहीं अपनाते हैं. इस वजह से हर साल JNAC को करोड़ों रुपये के राजस्व का घाटा उठाना पडता है.
वहीं भवन निर्माण करा रहे लोगों का कहना है कि JNAC से मकान की परमिशन आसानी से नहीं मिलती है. आवेदकों को अधिकारी-कर्मचारी कार्यालय के कई चक्कर कटवाते हैं. इसी झंझट के चलते लोग भवन बनाने से पहले अनुमति लेने से बचते हैं. यह भी शिकायत है कि बिना परमिशन भवन निर्माण के मामलों में कार्रवाई के नाम पर संबंधित कर्मचारी सुविधा शुल्क लेकर खामोश हो जाते हैं.
नियमानुसार नक्शे को JNAC आफिस से स्वीकृत कराना अनिवार्य होता है. लेकिन पैसे बचाने के लालच में लोग बनवाए गये नक्शे को पास नहीं करवाते हैं तथा बिना परमिशन मनमर्जी से भवन निर्माण कराते हैं. जो लोग नक्शा पास करवाते हैं तो नक्शे के अनुसार काम नहीं करवाते हैं. स्वीकृत नक्शे के बजाय निर्माण का दायरा बढ़ाकर सड़क व आसपास की खाली जमीन पर भी मकान खड़े किए जा रहे हैं. ऐसे में नक्शा पास कराना और नहीं कराना बराबर हो जाता है.



