


जमशेदपुर: देश की प्रसिद्ध पंडवानी गायिका एवं पद्मविभूषण सम्मानित लोक कलाकार तीजन बाई के निधन की खबर से कला और संस्कृति जगत में शोक की लहर है। जमशेदपुर के वरिष्ठ समाजसेवी अशोक गोयल ने भी उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए उनके साथ बिताए गए पलों को याद किया।
वर्ष 2022 में जमशेदपुर आई थीं तीजन बाई
अशोक गोयल ने बताया कि वर्ष 2022 में तीजन बाई रांची में आयोजित एक सांस्कृतिक कार्यक्रम में भाग लेने के बाद जमशेदपुर आई थीं। रांची के मोराबादी में युगांतर भारती द्वारा आयोजित सात दिवसीय पर्यावरण मेले में उनके पंडवानी कार्यक्रम ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया था। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद तीजन बाई अपने सहयोगियों के साथ सुबह करीब पांच बजे जमशेदपुर पहुंची थीं।
कला और संस्कृति पर हुई थी लंबी चर्चा
अशोक गोयल के अनुसार, जमशेदपुर पहुंचने के बाद उन्होंने तीजन बाई एवं उनके साथ आए कलाकारों को स्वर्णरेखा गेस्ट हाउस में ठहराया था। इस दौरान करीब दो से ढाई घंटे तक उनके बीच भारतीय लोककला, संस्कृति, पंडवानी परंपरा और सामाजिक विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई।
उन्होंने बताया कि बातचीत के दौरान तीजन बाई की कला के प्रति समर्पण और भारतीय सांस्कृतिक विरासत को लेकर उनकी गहरी समझ स्पष्ट रूप से दिखाई देती थी। इसके बाद सुबह करीब आठ बजे उन्हें रायपुर जाने वाली ट्रेन में विदा किया गया।
पंडवानी कला की अमूल्य धरोहर थीं तीजन बाई
अशोक गोयल ने कहा कि तीजन बाई ने अपने पूरे जीवन को पंडवानी कला के संरक्षण और संवर्धन के लिए समर्पित किया। महाभारत के पात्रों का उनका जीवंत चरित्र चित्रण और अनूठी प्रस्तुति शैली उन्हें देश और दुनिया में विशिष्ट पहचान दिलाती थी।
उन्होंने कहा कि तीजन बाई का निधन केवल एक कलाकार का निधन नहीं, बल्कि भारतीय लोक संस्कृति की एक महत्वपूर्ण आवाज का मौन हो जाना है। उनके जाने से पंडवानी कला प्रेमियों और सांस्कृतिक जगत को अपूरणीय क्षति हुई है।



