



● मुख्यमंत्री छात्रों के प्रतिनिधिमंडल से तत्काल वार्ता कर आंदोलन का सम्मानजनक समाधान निकालें
● JPSC से भी बड़ा घोटाला JSSC CGL में हुआ, पिछले 5-6 वर्षों से भर्ती प्रक्रिया सवालों के घेरे में
● मेरे कार्यकाल में 1.33 लाख से अधिक सरकारी नियुक्तियां पूरी पारदर्शिता के साथ हुईं, किसी परीक्षा पर उंगली नहीं उठी : रघुवर दास
जमशेदपुर। पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने झारखंड में JPSC एवं JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर आंदोलनरत छात्रों के समर्थन में राज्य सरकार से अविलंब हस्तक्षेप करने की अपील की। जमशेदपुर परिसदन में पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि यह केवल 14वीं JPSC परीक्षा का मामला नहीं है, बल्कि पिछले पाँच-छह वर्षों से भर्ती परीक्षाओं में लगातार अनियमितताओं के आरोप लगते रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि JSSC CGL परीक्षा में भी गंभीर स्तर की गड़बड़ियाँ हुई हैं, जिसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि जिस परीक्षा एजेंसी (TDPL) को उत्तर प्रदेश में ब्लैकलिस्ट किया गया था और जिसे स्वयं JPSC ने वर्ष 2025 में ब्लैकलिस्ट किया था, उसी एजेंसी को वर्ष 2026 में पुनः परीक्षा आयोजित करने की जिम्मेदारी दिए जाने से छात्रों के बीच अविश्वास पैदा हुआ है। उन्होंने कहा कि सरकार को छात्रों की जायज़ मांगों पर गंभीरता से विचार करते हुए 14वीं JPSC परीक्षा रद्द करनी चाहिए तथा पूरे मामले की जांच CID के बजाय CBI से करानी चाहिए।
रघुवर दास ने कहा कि दिल्ली में NEET परीक्षा के मामले पर विपक्षी दलों ने जिस तरह आवाज उठाई, उसी प्रकार झारखंड के छात्रों के मुद्दे पर भी उन्हें संवेदनशील होना चाहिए। उन्होंने कांग्रेस, झामुमो, राजद, आम आदमी पार्टी, समाजवादी पार्टी तथा वाम दलों से सवाल करते हुए कहा कि क्या झारखंड के छात्र देश के छात्र नहीं हैं। उन्होंने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से अपील की कि वे दलगत राजनीति से ऊपर उठकर भगवान बिरसा मुंडा की धरती पर आएं और आंदोलनरत छात्रों के दर्द को समझें।
उन्होंने वर्ष 2024 की उत्पाद सिपाही भर्ती दौड़ के दौरान 19 अभ्यर्थियों की हुई असामयिक मौतों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन परिवारों को भी न्याय और समुचित मुआवजा मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार अन्य राज्यों के मामलों पर विपक्ष मुखर रहता है, उसी प्रकार झारखंड के युवाओं के साथ भी समान संवेदनशीलता दिखाई जानी चाहिए।
पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा कि झारखंड एक पिछड़ा राज्य है, जहां ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवार कठिन परिस्थितियों में अपने बच्चों को पढ़ाते हैं ताकि उन्हें रोजगार मिल सके। लेकिन लगातार पेपर लीक, भ्रष्टाचार और परीक्षा संबंधी अनियमितताओं के कारण केवल छात्रों का ही नहीं बल्कि उनके माता-पिता का सपना भी टूट रहा है।
आंदोलनरत छात्रों की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि लगातार बारिश के बावजूद धरनास्थल पर छात्रों को तिरपाल लगाने तक की अनुमति नहीं दी जा रही है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण विरोध प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। उन्होंने जिला प्रशासन से धरनास्थल पर टेंट, पेयजल एवं अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार समय रहते छात्रों के प्रतिनिधिमंडल से बातचीत कर समाधान नहीं निकालती है तो आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है। उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से आग्रह किया कि छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए शीघ्र वार्ता कर आंदोलन का सम्मानजनक समाधान निकाला जाए।
उपचुनाव परिणामों पर बोले- स्थानीय मुद्दों का होता है प्रभाव
बिहार, मध्य प्रदेश और गुजरात के हालिया उपचुनावों पर प्रतिक्रिया देते हुए रघुवर दास ने कहा कि उपचुनाव मुख्यतः स्थानीय मुद्दों पर लड़े जाते हैं और इनके परिणामों से न राष्ट्रीय राजनीति प्रभावित होती है और न ही प्रदेश की राजनीति। उन्होंने कहा कि जहां भारतीय जनता पार्टी को अपेक्षित सफलता नहीं मिली है, वहां संगठन निश्चित रूप से आत्ममंथन करेगा।
जमशेदपुर फुटबॉल क्लब के मुद्दे पर करेंगे पहल
जमशेदपुर फुटबॉल क्लब के संचालन पर उठे सवालों के जवाब में उन्होंने कहा कि उन्होंने भी इस संबंध में समाचारों के माध्यम से जानकारी प्राप्त की है। उन्होंने कहा कि वे टाटा स्टील से इस विषय पर बातचीत करेंगे और यह जानने का प्रयास करेंगे कि किन परिस्थितियों में ऐसी स्थिति बनी। उन्होंने उम्मीद जताई कि जमशेदपुर में खेलों की समृद्ध परंपरा को बनाए रखने के लिए सकारात्मक पहल की जाएगी।
अपने कार्यकाल का किया उल्लेख, कहा—5 वर्षों में 1.33 लाख नियुक्तियां पारदर्शिता से हुईं
अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल का उल्लेख करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा कि वर्ष 2014 से 2019 के बीच डबल इंजन सरकार के दौरान लगभग 1.33 लाख सरकारी नियुक्तियां पूरी पारदर्शिता के साथ की गईं। उन्होंने कहा कि उस अवधि में दरोगा, शिक्षक, वनरक्षी, महिला बटालियन, पहाड़िया बटालियन सहित अनेक भर्तियां समयबद्ध तरीके से हुईं और किसी भी परीक्षा में पेपर लीक या गंभीर अनियमितता का आरोप नहीं लगा।
उन्होंने कहा कि सरकार ने स्वच्छ और विश्वसनीय परीक्षा एजेंसियों के माध्यम से लगातार मॉनिटरिंग करते हुए भर्ती प्रक्रिया पूरी कराई। उनका दावा था कि यदि भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी होती तो इतनी बड़ी संख्या में पारदर्शी नियुक्तियां संभव नहीं होतीं।
रघुवर दास ने कहा कि पिछले कई वर्षों से यदि भर्ती परीक्षाओं में लगातार शिकायतें आ रही थीं तो सरकार और मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) को पहले ही सतर्क हो जाना चाहिए था। उन्होंने कहा कि इसी कारण छात्रों की CBI जांच की मांग उचित प्रतीत होती है और सरकार को इसे गंभीरता से स्वीकार करना चाहिए।


