
पर्यावरण संरक्षण की मिसाल बन चुकीं पद्मश्री सम्मानित श्रीमती जमुना टुडू को भारत की राष्ट्रपति द्वारा स्वतंत्रता दिवस की संध्या पर विशेष रात्रि भोज में आमंत्रित किया गया है। यह आमंत्रण पत्र भारतीय डाक विभाग द्वारा विशेष व्यवस्था के तहत सीधे उनके घर तक पहुँचाया गया, जिसने इस अवसर को और भी गरिमामय बना दिया।
श्रीमती जमुना टुडू को यह आमंत्रण स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति भवन में आयोजित विशेष रात्रि भोज में शामिल होने के लिए भेजा गया। यह पत्र नई दिल्ली से उनके चाकुलिया स्थित आवास तक पहुँचाने के लिए डाक विभाग ने विशेष अधिकारियों की नियुक्ति की थी। जब यह आमंत्रण उनके हाथों में पहुँचा, तो वह भावविभोर हो गईं। उनके पति भी इस सम्मान से अत्यंत प्रसन्न नजर आए।
श्रीमती जमुना टुडू, जिन्हें ‘लेडी टारजन’ के नाम से जाना जाता है, एक समय दिहाड़ी मजदूरी करती थीं और उनके पति राज मिस्त्री का कार्य करते थे। लेकिन काम के बाद वे जंगलों की रक्षा के लिए सक्रिय रहती थीं। उन्होंने गांव की महिलाओं को संगठित कर हजारों पेड़ों को काटे जाने से बचाया। उनका प्रयास केवल पेड़ों को बचाना नहीं था, बल्कि यह लोगों में पर्यावरण के प्रति चेतना जगाने का एक बड़ा अभियान बन गया।
इस साहसिक कार्य के दौरान उन्हें कई बार पेड़ माफियाओं का विरोध झेलना पड़ा। उन पर जानलेवा हमले भी हुए, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। उनका दृढ़ संकल्प और समर्पण ही था, जिसने उन्हें भारत सरकार द्वारा पद्मश्री सम्मान दिलाया।
राष्ट्रपति महोदया की ओर से मिले इस आमंत्रण ने उनके संघर्ष को नई पहचान दी है। आमंत्रण मिलने के बाद श्रीमती टुडू ने भारतीय डाक विभाग का दिल से आभार व्यक्त किया और कहा कि यह सम्मान उनके जैसे सभी कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणा है जो प्रकृति की रक्षा में लगे हैं।
