


जमशेदपुर: शहर के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान करीम सिटी कॉलेज में सेंटर फॉर एकेडमिक डेवलपमेंट (CAD) के तत्वावधान में आयकर (Income Tax) के विषय पर एक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। इस व्याख्यान का मुख्य विषय ‘आयकर को सरलीकृत रूप में समझना: अवधारणाएं, गणना और अनुपालन’ (Income Tax Simplified: Concepts, Calculation and Compliance) रखा गया था। कार्यक्रम में वाणिज्य संकाय के सहायक प्राध्यापक डॉ. आफ़ताब आलम ने मुख्य वक्ता के रूप में शिरकत की और इनकम टैक्स से जुड़ी बारीकियों पर विस्तार से प्रकाश डाला।
आयकर की अदायगी के लिए अपडेट रहना आवश्यक
कार्यक्रम की शुरुआत कैड की कन्वेनर डॉ. संध्या सिन्हा के स्वागत भाषण से हुई। उन्होंने विषय प्रवेश कराते हुए कहा कि प्रत्येक वित्तीय वर्ष में आयकर के नियम और समीकरण बदलते रहते हैं। इसकी अदायगी के तरीकों को लगातार उन्नत किया जा रहा है, इसलिए करदाताओं को अपने आयकर अदायगी के लिए अपडेट, सजग और सूचना संपन्न होना बेहद आवश्यक है।
डिजिटल माध्यम से टैक्स चुकाना है नागरिक का कर्तव्य
मुख्य वक्ता डॉ. आफ़ताब आलम ने पीपीटी (PPT) के माध्यम से अपना संबोधन प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि आजकल हर व्यक्ति पैसे की अधिक आमद के लिए प्रयासरत है, लेकिन आयकर के विषय में बहुत कम जानकारी रखता है। उन्होंने टैक्स बचत के लिए वित्तीय निवेश और खर्च के सही क्षेत्रों की जानकारी दी। साथ ही, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि हम डिजिटल माध्यमों का उपयोग कर समय पर आयकर अदा करके एक जिम्मेदार और सजग नागरिक का कर्तव्य कैसे निभा सकते हैं।
प्रश्नोत्तरी सत्र में सुलझाई गईं इनकम टैक्स की जटिलताएं
डॉ. आफ़ताब आलम के व्याख्यान के बाद एक खुला प्रश्नोत्तरी सत्र आयोजित किया गया। इसमें डॉ. आले अली, डॉ. अनवर शहाब और डॉ. मोहम्मद मुइज अशरफ ने अपनी शंकाएं और प्रश्न रखे, जिनका मुख्य वक्ता ने बारी-बारी से संतोषजनक उत्तर दिया। इसी सत्र में वाणिज्य संकाय के अध्यक्ष डॉ. मोइज़्ज़म नज़री ने भी इनकम टैक्स की जटिलताओं और उनसे निपटने के व्यावहारिक उपायों को विस्तार से समझाया।
आयकर भरना देश के प्रति हमारी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी
कार्यक्रम के अंतिम चरण में अध्यक्षता कर रहे महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. मोहम्मद रेयाज ने उपस्थित लोगों को संबोधित किया। अपने अध्यक्षीय भाषण में उन्होंने कहा कि प्रत्येक वेतनभोगी (नौकरीपेशा) कर्मचारी का यह नागरिक कर्तव्य है कि वह समय पर आयकर भरना सुनिश्चित करे। यह देश के प्रति हमारी एक जरूरी जिम्मेदारी भी है। उन्होंने कार्यालयीन स्तर पर मिलने वाली सहायता के उदाहरण भी प्रस्तुत किए। अंत में, वाणिज्य संकाय के प्राध्यापक डॉ. जाहिद परवेज़ ने धन्यवाद ज्ञापन कर कार्यक्रम का सफल समापन किया।



